अमेरिका ने हाफिज सईद को पाकिस्तान द्वारा जेल की सजा सुनाने के फैसले की सराहना की है। वाशिंगटन के साथ भारत भी एक लंबे समय से इसकी मांग करता रहा है। दक्षिण एशिया मामलों की शीर्ष राजनयिक एलिस वेल्स ने ट्वीट किया कि हाफिज सईद और उसके सहयोगी की सजा मिलना, उसके अपराधों के लिए लश्कर को जवाबदेह बनाने और पाक के लिए वैश्विक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने आतंकी समूह लश्कर-ए-ताइबा का भी जिक्र किया। मुंबई हमले के लिए भारत-अमेरिका दोनों ने एलईटी को जिम्मेदार ठहराया है। बता दें कि इस हमले में 166 लोग मारे गए थे।
पाकिस्तान की अदालत से लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी हाफिज सईद को सजा देने मात्र से भारत का रुख नहीं बदलेगा। विदेश मंत्रालय वेट एंट वॉच की नीति अपनाते हुए देखना चाहती है कि पाकिस्तान अपने यहां पल रहे आतंकी तंत्र के खिलाफ कितना ठोस कदम उठाता है। उसी आधार पर दोनों देशों के बीच संबंध सुधार की पहल निर्णय किया जाएगा।
विदेश मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान की अदालत ने सईद को 2019 के टेरर फंडिंग मामले में सजा सुनाई है। यह दरअसल 16 जनवरी को फाइनांशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की बैठक के मद्देनजर हुआ है। भारत यह देखेगा कि अदालत के आदेश का जमीनी तौर पर कितना असर होता है। इसके अलावा पाकिस्तान आगे कितनी और कैसी कार्रवाई करता है इसपर भविष्य की नीति तय होगी।
गौरतलब है कि एफएटीएफ ने पिछले साल नवंबर में पाकिस्तान को आगाह किया था कि अगर वह आतंकवाद और उसकी फंडिंग के खिलाफ गंभीर कदम नहीं उठाता तो उसे ग्रे लिस्ट से ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा।
भारत का मानना है कि जैश-ए-मोहम्मद सरगना मौलाना मसूद अजहर समेत कई बड़े आतंकी खुलेआम घूम रहे हैं। मुंबई और बालाकोट हमलों के आरोपी पर अबतक कोई विश्वसनीय कार्रवाई नहीं हुई है। इन मामलों में पाकिस्तान हमेशा से टालमटोल करता रहा है। मंत्रालय के मुताबिक अगर पाकिस्तान भारत के साथ संबंध सुधारने को लेकर गंभीर है तो उसे एफएटीएफ से इतर आतंकियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी होगी।