भारत और नेपाल के बीच दिल्ली में हुई गृह सचिव स्तरीय बैठक में सीमा सुरक्षा और आपराधिक मामलों में सहयोग को बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने प्रत्यर्पण संधि को अंतिम रूप देने और सीमावर्ती अपराधों को रोकने पर सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया।
भारत-नेपाल के बीच गृह सचिव स्तरीय बैठक हुई। इसमें भारत की ओर से गृह सचिव गोविंद मोहन और नेपाल के गृह सचिव गोकरण मणि द्वाडी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे थे। बैठक के दौरान दोनों देशों ने अब तक के द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग और सीमा प्रबंधन की पूरी समीक्षा की और इसे और सशक्त बनाने का संकल्प लिया।
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बैठक में सीमा पर मौजूद सीमांकन स्तंभों की मरम्मत और रखरखाव, सीमा-पार आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण, सीमा जिला समन्वय समितियों के कामकाज की समीक्षा और सीमा पर जरूरी आधारभूत ढांचे जैसे इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी), सड़कों और रेलवे नेटवर्क के विस्तार पर भी बातचीत हुई।
आपदा प्रबंधन और सुरक्षा संस्थानों को मिलेगी मजबूती
दोनों देशों ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने, सुरक्षा से जुड़े विभिन्न संस्थानों की क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर भी सहमति जताई। इससे दोनों देशों के सुरक्षा बलों की तत्परता और तालमेल में वृद्धि होगी।
परस्पर कानूनी सहायता की दिशा में अहम कदम
भारत और नेपाल ने आपराधिक मामलों में परस्पर कानूनी सहायता के लिए समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देने का स्वागत किया। साथ ही, प्रत्यर्पण संधि के संशोधित प्रारूप को जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता भी जाहिर की गई, जिससे दोनों देशों के बीच वांछित अपराधियों के आदान-प्रदान में तेजी लाई जा सकेगी।
गृह मंत्रालय के बयान के मुताबिक, अगली गृह सचिव स्तर की बैठक नेपाल में आयोजित की जाएगी, जिसकी तारीख दोनों देशों की आपसी सहमति से तय की जाएगी। यह बैठक भारत-नेपाल के बीच बढ़ते कूटनीतिक और सुरक्षा सहयोग का संकेत देती है।