नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुूब्रमण्यम (फाइल)
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नीति आयोग ने गुरुवार को एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया कि भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर ढांचे को तर्कसंगत बनाने की जरूरत है। ऐसा इसलिए ताकि इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में उत्पादन की लागत को कम किया जा सके। इसके अलावा अन्य देशों के साथ प्रभावी प्रतिस्पर्धा करने के लिए भी कर ढांचे को तर्कसंगत बनाने पर जोर दिया गया है।
नीति आयोग का इन बातों पर जोर
‘इलेक्ट्रॉनिक्स: वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी को सशक्त बनाना’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में नीति आयोग ने राजकोषीय, वित्तीय, नियामक और बुनियादी ढांचों में हस्तक्षेप का भी सुझाव दिया है। आयोग के अनुसार ऐसा करने से मोबाइल फोन समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिल सकेगी।
'इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में कर संरचना को तर्कसंगत बनाने की जरूरत'
रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि दूसरे देशों की अर्थव्यवस्थाओं के साथ प्रतिस्पर्धा के लिए भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र के लिए कर संरचना को तर्कसंगत बनाने की जरूरत है। इसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों तरह के कर शामिल हैं। इसके अलावा आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में उत्पादन लागत को कम करने पर भी जोर दिया है। नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में एक और सुझाव दिया है। बताया गया है कि राजस्व को बढ़ाने के लिए तीन श्रेणियों के तहत काम किया जा सकता है। यहां आयोग ने ओपेक्स, कैपेक्स और हाइब्रिड समर्थन का जिक्र किया।
- ओपेक्स समर्थन- ऐसे इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्माण, जिनमें ज्यादा मेहनत नहीं लगती।
- कैपेक्स समर्थन- ऐसे इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्माण, जिनमें ज्यादा मेहनत लगती है।
- हाइब्रिड समर्थन- इसे ओपेक्स और कैपेक्स को जोड़कर बनाया गया है।
नीति आयोग ने ये सुझाव भी दिए
रिपोर्ट में भारत सरकार को मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण समूहों (ईएमसी) का ऑडिट करने का भी सुझाव दिया गया है। आयोग के अनुसार इस तरह से काम के दौरान आने वाली समस्याओं और काम के लिए प्रदान की गई सुविधाओं की स्थिति का मूल्यांकन आसान होगा। आयोग ने बताया कि उच्च उत्पादन शुल्क की वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को बढ़ाने में बाधाएं आ रहीं हैं। इसके अलावा और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा जारी रखने की क्षमता पर भी असर पड़ रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पर शुल्क लगभग 7.5 प्रतिशत है। उधर चीन का चार प्रतिशत, मलयेशिया का 3.5 प्रतिशत और मेक्सिको का 2.7 प्रतिशत है। साफ है कि इन देशों का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पर शुल्क भारत से कम है।