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कोरोना: विदेश मंत्रालय ने कहा- विदेशों को वैक्सीन सप्लाई के बारे में बात करने का यह सही वक्त नहीं

Fri, 04 Jun 2021 03:03 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली

सार

  • भारत टीकाकरण अभियान के लिए घरेलू उत्पादन में तेजी लाने पर दे रहा है ध्यान।
  • विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत अमेरिकी वैक्सीन निर्माता कंपनियों फाइजर, जॉनसन एंड जॉनसन और मॉर्डना के साथ संपर्क में है।
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कोरोना वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI
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विस्तार
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दुनियाभर में कोरोना वैक्सीन की बढ़ती मांग के बीच विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि अन्य देशों को टीके की आपूर्ति के बारे में बात करने का यह सही वक्त नहीं है क्योंकि अभी हम अपने लोगों के टीकाकरण अभियान के लिए घरेलू उत्पादन में तेजी लाने पर ध्यान दे रहे हैं।

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घरेलू इस्तेमाल के लिए वैक्सीन आपूर्ति सुनिश्चित करने के सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत अमेरिकी वैक्सीन निर्माता कंपनियों फाइजर, जॉनसन एंड जॉनसन और मॉर्डना के साथ संपर्क में है। साथ ही टीके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के लिए भी हम अमेरिकी प्रशासन के साथ काम कर रहे हैं।
 
यात्रा प्रतिबंध को हटाने की शुरुआत करें देश
विभिन्न देशों की ओर से भारतीयों पर लगे यात्रा प्रतिबंध को लेकर उन्होंने कहा कि हम अन्य देशों से उम्मीद करते हैं कि चूंकि अब भारत में कोरोना महामारी की स्थिति सामान्य हो रही है, उन्हें यात्रा प्रतिबंधों में राहत देनी चाहिए। कुछ देशों ने ऐसा करना शुरू कर दिया है। बाकी देशों को भी उनका अनुसरण करना चाहिए।
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कोविड उत्पत्ति के बारे में जानकारी जरूरी है
कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही गतिविधियों को लेकर बागची ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) वैश्विक अध्ययन करवा रहा है। इस महामारी की उत्पत्ति के बारे में ठीक जानकारी के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहला कदम है। हमने पहले भी अधिक अध्ययन पर सहयोग करने की बात कहते रहे हैं।

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स्थानीय स्तर पर वैक्सीन उत्पादन के लिए बड़ी फार्मा कंपनियों से हो रही बातचीत : विदेश सचिव

विदेश सचिव हर्ष शृंगला ने कहा कि भारत सरकार वैश्विक वैक्सीन निर्माता कंपनियों फाइजर, जॉनसन एंड जॉनसन और मॉडर्ना के साथ भारत में वैक्सीन निर्माण करने के लिए बात कर रही है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मंच से बृहस्पतिवार को कहा कि भारत डब्ल्यूएचओ द्वारा भारतीय वैक्सीन कोवाक्सिन की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। साथ ही वैश्विक स्तर पर सभी के लिए वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत विश्व व्यापार संगठन में कई अन्य देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि ट्रिप्स के मामले में अस्थायी छूट हासिल की जा सके और सभी को वैक्सीन उपलब्ध हो सके।

बता दें कि कोवाक्सीन को भारत बायोटेक और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। कंपनी ने डब्ल्यूएचओ को 90 फीसदी से ज्यादा दस्तावेज सौंप दिए हैं। इससे पहले विदेश सचिव ने दोहराया कि महामारी की चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर की क्षमता विकसित की प्रक्रिया में भारत सक्रिय भूमिका निभाएगा और एक नई वैश्विक सप्लाई चेन विकसित करने की अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया में पूर्ण भागीदारी करेगा। विदेश सचिव ने कहा, हमें रातों रात नई क्षमताएं विकसित करनी पड़ी और अपने उद्देश्यों को फिर से पुर्नस्थापित करते हुए एक पूरी तरह नई महामारी डिप्लोमेसी विकसित की।

वैश्विक स्तर की क्षमता बनाने की प्रक्रिया में हिस्सा लेगा भारत
विदेश सचिव ने कहा, भारत महामारी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर की क्षमता बनाने की प्रक्रिया में हिस्सा लेगा। जी-7, जी-20, क्वाड, ब्रिक्स, संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे मंचों पर इस बारे में कई गंभीर विकल्पों पर विचार चल रहा है।  

कोरोना महामारी से निपटने में भारत सरकार के प्रयासों को गिनाते हुए शृंगला ने कहा कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारत सरकार के अधिकार प्राप्त समूह की वैश्विक शाखा के रूप में काम किया है। मंत्रालय ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए कच्चे माल की खरीद और मेडिकल सप्लाई सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है। विदेश सचिव ने बताया कि महामारी के समय भारत ने वर्चुअल डिप्लोमेसी को अपनाया।
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