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अमेरिका-ईरान के तनाव से अछूता नहीं रहेगा भारत, परमाणु डील पर पड़ सकता है असर

Wed, 09 May 2018 05:02 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अमेरिकी राष्ट्रपति के ईरान परमाणु समझौते से हटने के बाद दुनिया की अर्थव्यवस्था अनिश्चितता के भंवर में फंसती दिखाई दे रही है, जिसका भारत पर असर तय है। भारत ने एक तरफ तो ईरान के साथ रिश्तों को बढ़ाते हुए कई समझौते कर लिए हैं और दूसरी तरफ अमेरिका से दोस्ती निभाने के लिए भारत के सामने ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों का दबाव रहेगा। इसके चलते देश में न सिर्फ तेल के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ सकती है बल्कि चाबहार परियोजना और कूटनीतिक स्तर पर भी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। 

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अमेरिका अब अपने सहयोगी देशों से बात कर ईरान पर नए प्रतिबंधों को लेकर विचार कर रहा है। इससे मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ेगा और वैश्विक कूटनीतिक रिश्ते बदलेंगे। भारत के लिए सऊदी अरब और इराक के बाद ईरान सबसे बड़ा तेल की आपूर्ति करने वाला देश है। लेकिन ट्रंप के फैसले के बाद प्रति बैरल तेल के दाम बढ़ना तय है, जिससे भारत में तेल के दाम बढ़ेंगे और महंगाई को बड़ी चुनौती मिलेगी।

एक समझौते के तहत भारत ईरान से अपनी ही मुद्रा में (बिना डॉलर) भुगतान कर तेल खरीद सकता है लेकिन प्रतिबंध लगने से दोनों देशों के बीच व्यापार पर असर पड़ेगा। उधर पाक से बिगड़ते रिश्तों के चलते भारत ओमान सागर में चाबहार बंदरगाह का विकास कर अफगानिस्तान के साथ व्यापार का मार्ग बना रहा है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस परियोजना पर भारत का काम धीमा पड़ जाएगा। 
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आशंका है कि चाबहार परियोजना के प्रभावित होने पर ईरान सरकार इस प्रोजेक्ट में चीन और पाक को शामिल कर लेगी, जिससे भारतीय हित प्रभावित होंगे। कूटनीतिक स्तर पर भी भारत के हित अफगानिस्तान के कारण ईरान के साथ जुड़े हुए हैं, जो नए इस्राइल व सऊदी अरब के अमेरिका के साथ बनते नए समीकरण से प्रभावित होंगे।
 

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भारत में तेल आयात पर नहीं पड़ेगा असर : आईओसी

भारतीय अधिकारियों ने कहा है कि ईरान पर वित्तीय प्रतिबंधों के अमेरिकी फैसले का भारत में इस्लामिक रिपब्लिक देशों से तेल आयात पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि ट्रंप की घोषणा के तुरंत बाद तेल के दामों में 2.5 फीसदी का इजाफा हो गया। लेकिन भारतीय तेल कार्पोरेशन (आईओसी) के वित्तीय निदेशक एके शर्मा ने कहा कि इसका त्वरित रूप से भारत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। 

उन्होंने कहा कि वह फिलहाल इंतजार कर रहे हैं और देख रहे हैं कि यूरोपीय देश इस संबंध में क्या रणनीति अपनाते हैं। उनके मुताबिक यूरोपीय देश फिलहाल ट्रंप के फैसले के साथ नहीं हैं इसलिए उनके ईरान पर प्रतिबंध लगाने की संभावना काफी कम है। तेल आपूर्ति के लिए यूरो डॉलर खुला होने के कारण भारत में तेल आयात पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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