अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ के बाद भारत ऐसा मिशन भेजने वाला चौथा और एशिया का पहला देश बना था। पहली बार में सफलता तो केवल भारत को मिली। पिछले महीने ही मंगलयान ने आठ साल पूरे किए थे।इसरो के अनुसार, इसने कई उपलब्धियां हासिल कीं। मिशन का उद्देश्य तकनीकी था। इसमें मिशन डिजाइन, मंगल की परिक्रमा करने की क्षमता युक्त यान तैयार करना व भेजना, मंगल की कक्षा में प्रवेश और परिक्रमा शामिल था।
बेहद किफायती होने से यह मिशन सराहा गया। अंतरिक्ष पर बनीं कई हॉलीवुड फिल्मों का बजट इससे ज्यादा था तो अमेरिका में इस तरह के मिशन पर 10 से 15 गुना तक ज्यादा खर्च आने की बात कही गई। आज भी इससे सस्ता मिशन कोई नहीं भेज सका है।
- इसके जरिये वैज्ञानिकों ने 2015 में मंगल ग्रह सोलर कोरोना का अध्ययन किया। सूर्य की कई बातें समझने में मदद मिली।
- 28 सितंबर, 2014 को यान ने मंगल की पहली पूर्ण तस्वीर भेजी। एक साल पूरे होने पर इसरो ने मार्स का 120 पृष्ठों का एटलस जारी किया। 2019 तक यह 2 टीबी का डाटा भेजा था।
- 1 जुलाई, 2020 को उसने मंगल के चंद्रमा फोबोस की तस्वीर भेजी जो करीब 4.2 हजार किमी दूर से ली गई थी।
- 24 मार्च, 2015 को अपने जीवन काल के छह महीने पूरे किए तो इसरो ने कहा था यह छह महीने और काम करेगा पर इसने आठ साल पूरे कर इस मिशन को बेहद सफल बनाया।