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'IWT स्थगित रहेगी': PAK को भारत की दो-टूक, गिलगित-बाल्टिस्तान के तथाकथित चुनाव गलत, कब्जे वाले इलाके खाली करो

Fri, 05 Jun 2026 07:14 PM IST
निर्मल कांत आईएएनएस, नई दिल्ली।

सार

भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान की ओर से तथाकथित चुनाव कराने की योजना पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं, जिनमें यह क्षेत्र शामिल है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के ऐसे कदम अवैध कब्जे और मानवाधिकार उल्लंघनों की सच्चाई को नहीं छिपा सकते। पढ़िए रिपोर्ट-
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रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय - फोटो : अमर उजाला ग्रााफिक/एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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भारत सरकार ने शुक्रवार को पाकिस्तान के उस फैसले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है, जिसमें वह कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में तथाकथित आम चुनाव कराने की योजना बना रहा है। भारत ने दोहराया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसके अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं, जिसमें तथाकथित गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है। 
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गिलगित-बाल्टिस्तान में तथाकथित आम चुनाव पर भारत ने कहा, ऐसे कदम पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों, राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और स्वतंत्रता के हनन जैसे मुद्दों को छिपा नहीं सकते।  

भारत सरकार ने इस कदम पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि तथाकथित 'गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा' के लिए सात जून 2026 को चुनाव कराने की योजना भारतीय क्षेत्र में अवैध और जबरन कब्जे वाले इलाकों में की जा रही है। 
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विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा,भारत का स्पष्ट और पुराना रुख है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे क्षेत्र भारत के अभिन्न अंग हैं, जिनमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है,  क्योंकि जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय 1947 में कानूनी और स्थायी रूप से हो चुका है। मंत्रालय की ओर से यह दो टूक प्रतिक्रिया तब आई, जब पाकिस्तानी अधिकारियों ने घोषणा की कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की तथाकथित विधानसभा की सभी सीटों के लिए मतदान 27 जुलाई को कराया जाएगा।

मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार पाकिस्तान के किसी भी ऐसे प्रयास को खारिज करती है, जिससे वह अपने अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में कोई बदलाव दिखाने की कोशिश करता है। भारत ने साफ कहा कि पाकिस्तान का यह दावा इस हकीकत को नहीं बदल सकता कि वह भारतीय क्षेत्रों पर अवैध रूप से कब्जा किए हुए है और उसे उन्हें खाली करना चाहिए।

भारत ने आगे कहा कि पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे ऐसे प्रयास वहां के गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों, राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और लोगों की स्वतंत्रता से वंचित करने की सच्चाई को छिपा नहीं सकते।

पिछले नवंबर में भी भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान से स्पष्ट कहा था कि वह उन क्षेत्रों में हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों को बंद करे, जिन्हें वह अवैध रूप से नियंत्रित करता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलनंदन ने कहा था कि हाल के हफ्तों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और उनके सहयोगियों ने कई निर्दोष नागरिकों को मार दिया है, जो अपने बुनियादी अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए आवाज उठा रहे थे। उन्होंने कहा था कि कश्मीर के लोग भारत के लोकतंत्र का हिस्सा हैं और वहां चुनावों में भाग लेना इसका प्रमाण है।

उन्होंने यह भी कहा था कि भारत के लोगों और जम्मू-कश्मीर के लोगों के द्वारा लिए गए लोकतांत्रिक फैसलों को बदनाम करने कोशिशों को भारत खारिज करता है और वहां हुई सामाजिक व आर्थिक प्रगति सबके सामने स्पष्ट है। 

उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान आत्मनिर्णय के सिद्धांत को गलत तरीके से पेश कर रहा है। भारत ने यह भी कहा कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 47 (अप्रैल 1948) के अनुसार पाकिस्तान को कश्मीर से अपनी सेना और नागरिकों को वापस बुलाना था। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया और अवैध कब्जा जारी रखा। भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं।

सिंधु जल संधि स्थगित रहेगी: भारत
भारत ने सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को लेकर भी अपना रुख दोहराते हुए स्पष्ट किया कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और विश्वसनीय तरीके से बंद नहीं करता, तब तक यह संधि स्थगित रहेगी।

विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान की ओर से भारत की चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना और सलाल बांध जलाशय से गाद निकालने की योजनाओं पर आपत्ति जताने के बाद आई है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि भारत पानी को "हथियार" के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है।

प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, हमने सिंधु जल संधि को स्थगित कर रखा है और यह तब तक स्थगित रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह समाप्त नहीं कर देता। जम्मू-कश्मीर में स्विट्जरलैंड के राजदूत की यात्रा पर पाकिस्तान की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर जायसवाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और स्विस राजदूत या किसी भी अन्य देश के राजदूत को वहां जाने की पूरी स्वतंत्रता है।
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