लॉकडाउन में बैठे-बैठे समय काटने के लिए सिगरेट, बीड़ी या हुक्का पी रहे हैं तो सावधान होने की जरूरत है। पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (पीएचई) के अनुसार धूम्रपान करने वालों को कोरोना का 14 गुना अधिक खतरा होता है। वहीं, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने लोगों से तंबाकू उत्पाद न खाने की अपील की है। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से भी मना किया है। इससे वायरस के फैलने का खतरा है। दरअसल, यह वायरस श्वास नलिका और फेफड़े को नुकसान पहुंचाता है। धूम्रपान से भी इन्हीं दोनों अंगों को नुकसान होता है। ऐसे में धूम्रपान करने वाले लोग कोरोना की चपेट में आए तो उनकी जान को खतरा अधिक है।
शरीर खुद को ठीक करने की क्षमता रखता है
प्रो. न्यूटन कहते हैं कोई भी किसी भी उम्र का हो उसे जल्द से जल्द धूम्रपान छोड़ देना चाहिए। दरअसल, शरीर की ‘सेल्फ हीलिंग’ तकनीक अपने आपको पुरानी स्थिति में ढालकर नुकसान के भरपाई की कोशिश करती है।
12 हफ्ते में दिखेगा फायदा
पीएचई की मानें तो धूम्रपान करने वाले लोगों को सांस फूलने और रक्त संचार की तकलीफ होती है। इसे वे भलि भांति समझते और महसूस भी करते हैं। धूम्रपान छोड़ दिया जाए तो व्यक्ति की सांस लेने की गति और रक्त संचार में सुधार होता है। वे 12 सप्ताह के भीतर सामान्य तरह के व्यायाम आसानी से कर सकते हैं।
भारत: दुनिया के 12 फीसदी लोग करते हैं धूम्रपान
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 15 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। खास बात ये है कि दुनियाभर में धूम्रपान करने वाले 12 फीसदी लोग भारत में रहते हैं। हर साल 10 लाख लोगों की मौत तंबाकू उत्पादों से होती है। 18.7 की उम्र में युवा सिगरेट पीना शुरू कर देते हैं।
चीन में पुरुषों की मृत्यु दर अधिक
चीन में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की मृत्यु दर अधिक रही। एक रिपोर्ट के अनुसार चीन के 50 फीसदी पुरुष धूम्रपान करते हैं जबकि महिलाओं में ये दर केवल 2 फीसदी है। कई गंभीर मामलों में डॉक्टर कुछ समझ पाते इससे पहले ही मरीज की अचानक मौत हो गई। इसका कारण भी धूम्रपान ही माना गया।