प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार से विशेष ट्रेन चलाने से संबंधित मांग की थी। केंद्रीय राजमार्ग एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने उनकी इस मांग को खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार से कहा था कि लॉकडाउन की वजह से महाराष्ट्र में फंसे मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के बारे में विचार हो। यदि केंद्र को लगता है कि 30 अप्रैल के बाद 15 मई तक कोरोना का प्रभाव बढ़ने वाला है तो यहां फंसे दूसरे राज्यों के मजदूरों को उनके घर भेजने की व्यवस्था की जाए।
केंद्रीय मंत्री गडकरी ने इस पर कहा, मैं उनकी (प्रवासी श्रमिकों) भावनाओं और परेशानियों को समझता हूं लेकिन हम बिना किसी सावधानी बरतें उन्हें अपने मूल स्थानों पर जाने नहीं दे सकते है। ऐसा करके (रेलगाड़ियों को चलाकर) निजामुद्दीन जैसी एक और स्थिति पैदा नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा, ‘मैं कहूंगा कि राज्य को अगले कुछ हफ्तों के लिए इन प्रवासी श्रमिकों का ध्यान रखना चाहिए। उन लोगों को यह समझना चाहिए कि कोरोना वायरस बीमारी के फैलने के कारण उनका उनके पैतृक गांवों में स्वागत नहीं किया जा सकता है।’
गडकरी ने कहा कि तीन मई के बाद लॉकडाउन की अवधि समाप्त होने के बाद रेलगाड़ी सेवाओं को अत्यंत सावधानी बरतते हुए शुरू किया जायेगा और लोगों को लंबे समय तक सुरक्षा उपायों का पालन करना होगा।
बता दें कि केंद्रीय अतिरिक्त सचिव मनोज जोशी के नेतृत्व में पांच सदस्यों की केंद्रीय टीम महाराष्ट्र पहुंची है। मंगलवार को मुख्यमंत्री ठाकरे ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए इस टीम के साथ चर्चा की थी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार दूसरे राज्यों के मजदूरों के रहने-खाने की व्यवस्था कर रही है लेकिन वे अपने घर जाना चाहते हैं। इसको लेकर वे आंदोलन पर उतारू हो जाते हैं। केंद्र सरकार सारी एहतियात बरतते हुए मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने पर विचार करे।
80 फीसदी मरीजों में नही दिख रहे लक्षण
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय टीम से कहा कि राज्य में 80 फीसदी कोरोना मरीजों में लक्षण दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में कोरोना वायरस का प्रसार दुबई व अमेरिका से हुआ है। अमेरिका की स्थिति पता है। लेकिन दुबई में इसके इलाज के लिए क्या किया जा रहा है यह पता नहीं है। इसका अध्ययन होना चाहिए। ठाकरे ने कहा कि हमें पीपीई किट और वेंटिलेटर आदि की जरूरत है। केंद्र सरकार महाराष्ट्र सरकार की मांगे पूरी करें।