माधव ने चीन के बारे में बात करते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि कोरोना वायरस संकट के मद्देनजर कई कंपनियां इस पड़ोसी देश को छोड़ कर चली जाएंगी और भारत उनके लिए एक आकर्षक गंतव्य होगा।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 के बाद के दौर में चीन से पूंजी का पलायन होगा और भारत निश्चित तौर पर उनके लिए एक आकर्षक गंतव्य होगा। भाजपा नेता ने कहा कि इस्लामोफोबिया के आरोप कुछ और नहीं, बल्कि कुछ खास तरह के दुष्प्रचार हैं और यह जमीनी हकीकत पर आधारित नहीं है।
उल्लेखनीय है कि भारत के कई हिस्सों में कोविड-19 फैलने के लिए मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराने वाले आरोपों के बाद विभिन्न अरब देशों के नागरिक अधिकार एवं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने तथा शीर्ष नागरिकों की गुस्सा भरी प्रतिक्रियाओं की ट्विटर पर झड़ी लग गई। इस्लामी सहयोग संगठन (ओईसी) ने हाल ही में भारत पर इस्लामोफोबिया का आरोप लगाया था। यह 57 देशों का एक संगठन है। हालांकि, भारत ने उसके आरोपों को खेदजनक बताते हुए खारिज कर दिया।
महामारी से प्रभावी रूप से निपटने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देते हुए माधव ने कहा कि भारत ने यह उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है कि किस तरह से एक दूरदर्शी नेतृत्व, लोकतांत्रिक सरकार और जन समर्थन इस तरह की चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट होकर काम कर सकता है।
उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस संकट से सफलतापूर्वक निपटने की एक बड़ी वजह यह है कि देश सरकार के पीछे एकजुटता से खड़ा है। वैश्विक नेताओं में मोदी की शानदार रेटिंग वाले सर्वेक्षणों का जिक्र करते हुए माधव ने कहा कि उन्होंने यह प्रदर्शित किया है कि उन्हें मुसलमानों, ईसाइयों और सभी अन्य समुदायों का समर्थन प्राप्त है।
उन्होंने कहा कि यह देखिए कि कोरोना योद्धाओं का मनोबल बढ़ाने के लिए दीये जलाने और ताली, (थाली, घंटी) बजाने की उनकी अपील पर देश ने क्या प्रतिक्रिया की थी। लेकिन कुछ तत्व विमर्श को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि वे मोदी-फोबिया से ग्रसित हैं।