भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और जापान की एयरोस्पेस एक्स्प्लोरेशन एजेंसी (जाक्सा) एकसाथ मिलकर साल 2024 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अंतरिक्षयान भेजेंगे। इसके लिए दोनों देश मिलकर तैयारी कर रहे हैं। दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों ने संयुक्त चंद्र ध्रुवीय खोज अभियान (लूपेक्स) को लेकर जारी इस साझेदारी की बृहस्पतिवार को समीक्षा की।
भारत और जापान के संयुक्त मिशन मून की योजना को 2017 में सार्वजनिक किया गया था। यदि दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-2 की सफल लैंडिंग हो जाती तो इससे संयुक्त परियोजना को आगे बढ़ाने में और मदद मिलती, लेकिन इसरो के सूत्रों का कहना है कि अभी भी बहुत संभावना है और इसरो व जाक्सा के वैज्ञानिक इस पर लगातार काम कर रहे हैं।
अंतरिक्ष विभाग में सचिव एवं इसरो प्रमुख के. सिवन और जाक्सा के अध्यक्ष हिरोशी यामाकावा ने ऑनलाइन हुई द्विपक्षीय बैठक में अपने-अपने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
इसरो ने कहा कि पृथ्वी अवलोकन, चंद्र सहयोग और उपग्रह नेवीगेशन को लेकर जारी सहयोग की समीक्षा के अलावा दोनों देश अंतरिक्ष स्थिति संबंधी जागरूकता और पेशेवर विनिमय कार्यक्रम में सहयोग के अवसर तलाशने पर भी सहमत हुए।
इस दौरान दोनों अंतरिक्ष एजेंसियों ने उपग्रह डाटा का इस्तेमाल कर चावल के फसल क्षेत्र और वायु गुणवत्ता निगरानी संबंधी सहयोगी गतिविधियों के लिए एक क्रियान्वयन समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।