सस्ती और किफायती दवाओं के लिए भारत का जन औषधि मॉडल अब जमीनी स्तर पर हजारों करोड़ों रुपये की बचत के रूप में दिखाई देने लगा है। बीते 10 साल में जन औषधि दवाओं ने मरीजों के 30 हजार करोड़ रुपये बचाए हैं। लोगों के बीच जेनेरिक दवाओं के प्रति जागरूकता लाने के लिए केंद्र सरकार ने एक सप्ताह तक अभियान शुरू करने का फैसला लिया है जिसका उद्घाटन शनिवार को दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा करेंगे।
शुक्रवार को प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के सीईओ रवि दधिचि ने बताया कि बीते 31 जनवरी तक देश में जन औषधि केंद्रों की संख्या बढ़कर 15 हजार तक पहुंची है जिसे अगले कुछ वर्ष में 25 हजार तक लेकर जाने का लक्ष्य है। इन दुकानों पर 2047 दवाएं और 300 तरह के सर्जिकल उपकरण शामिल हैं जो ब्रांडेड दवाओं की तुलना में खुदरा दुकानों पर 50% से 80% सस्ते में बेचे जा रहे हैं। पिछले 10 वर्षों में जन औषधि केंद्रों की संख्या में 180 गुना वृद्धि हुई है। 2014 में केवल 80 केंद्र थे। वित्तीय वर्ष 2023-24 में जन औषधि ने 1,470 करोड़ रुपये का कारोबार किया जबकि चालू वित्त वर्ष में 31 जनवरी तक 1,606 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है। इस तरह देश में जेनेरिक दवाओं की बिक्री में करीब 200 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। जन औषधि केंद्रों पर महिलाओं के लिए ऑक्सी-बायोडिग्रेडेबल सेनेटरी नैपकिन भी उपलब्ध हैं जिनकी एक रुपये प्रति पैड कीमत है। अब तक इन केंद्रों से 72 करोड़ से अधिक सेनेटरी पैड बेचे गए। सीईओ ने बताया कि एंटीबायोटिक, एंटी-डायबिटीज, कार्डियोवैस्कुलर, एनाल्जेसिक व एंटीपयरेटिक, एंटी-एलर्जी, जैसी दवाएं यहां उपलब्ध हैं।
ऐसे चलेगा अभियान
सात मार्च को देश में जन औषधि दिवस का सातवां वर्ष मनेगा। इसके लिए एक मार्च से अभियान शुरू होगा। इसमें जगह-जगह जन औषधि जन चेतना अभियान या पदयात्रा निकलेगी। दो मार्च को जन आरोग्य मेला, तीन को जन औषधि बाल मित्र भागीदारी, चार को महिला भागीदारी, 5 को सेमिनार, 6 को जन औषधि मित्र पंजीकरण अभियान और 7 मार्च को जन औषधि उत्सव पूरे देश में एक साथ मनेगा। इस दौरान 200 केंद्रों की शुरुआत एक ही दिन होगी।
दवाओं की बिक्री पर प्रोत्साहन
पीएमबीजेपी सीईओ रवि दधिचि ने बताया कि सरकार जन औषधि केंद्र मालिकों को मासिक खरीद का 20% प्रोत्साहन राशि दे रही है जो तकरीबन 20 हजार रुपये तक है। उत्तर-पूर्वी राज्यों, हिमालयी क्षेत्रों, द्वीप क्षेत्रों और नीति आयोग द्वारा आकांक्षी जिलों के अलावा महिला उद्यमियों, पूर्व सैनिकों, दिव्यांगों, एससी और एसटी द्वारा खोले गए केंद्रों को फर्नीचर, कंप्यूटर, रेफ्रिजरेटर और अन्य खर्च को पूरा करने के लिए दो लाख रुपये दिए जा रहे हैं।
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