हिंद महासागर में चीनी नौसेना की करतूतों की काट के लिए भारत छह नई परमाणु पनडुब्बियों के निर्माण पर काम कर रहा है। नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि हिंद महासागर में समुद्री लुटेरों से बचाव के नाम पर चीनी पनडुब्बियों की हरकत तर्कसंगत नहीं है। भारत के पास इस समय आईएनएस अरिहंत और आईएनएस चक्र नाम से दो परमाणु पनडुब्बी हैं।
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एडमिरल लांबा ने माना है कि चीनी नौसेना से चुनौतियां हैं। उनके मुताबिक, चीन की पनडुब्बी 2013 से हिंद महासागर में साल में दो बार गश्त कर रही हैं। उन्होंने पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह पर चीनी नौसेना के बेड़े के पहुंचने की संभावना का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारत के लिए सुखद स्थिति नहीं होगी।
लांबा ने कहा, सामरिक कारणों से भारत की नई परमाणु पनडुब्बियों के बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की जा सकती। बातचीत में नौसेना प्रमुख ने माना कि देश के दो परमाणु पनडुब्बियों में से एक आईएनएस चक्र दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी।
उसका सोनार पैनल अलग हो गया था। आईएनएस चक्र को रूस से लीज पर लिया गया है। रूसी मीडिया ने यह आरोप लगाया था कि इस दुर्घटना के वक्त पनडुब्बी में एक अमेरिकी सवार था। एडमिरल लांबा ने इस आरोप को खारिज किया है।
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लांबा ने कहा कि आईएनएस चक्र की मरम्मत चल रही है और इसे जल्द ही बेड़े में फिर से शामिल कर लिया जाएगा।
2020 तक मिल जाएगा पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत
एडमिरल ने यह जानकारी भी दी कि देश का पहला स्वदेशी विमान वाहक पोत 2020 तक नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा। इस पोत के लिए स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस का मौजूदा मॉडल अब तक ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं है। इसके हल्के मॉडल विकसित करने पर काम चल रहा है। तेजस के वजन के लेकर नौसेना उसे विमानवाहक पोत के लिए सही नहीं मान रही।