भारत-चीन सीमा पर सोमवार की रात हुई हिंसक झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल और दो जवान शहीद हो गए। इसको लेकर विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि हम कुछ बेहतर की उम्मीद कर रहे थे।
चीनी पक्ष गलवां घाटी में एलएसी का सम्मान करते हुए पीछे चला गया, लेकिन चीन के द्वारा स्थिति बदलने की एकतरफा कोशिश करने पर 15 जून को एक हिंसक झड़प हो गई। इसमें दोनों पक्षों को नुकसान हुआ है। हमारे एक अधिकारी और दो जवान शहीद हुए। चीन के सैनिकों की भी मौत हुई है। इससे बचा जा सकता था।
हिंदुस्तान अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करता। भारत ने हमेशा एलएसी का सम्मान किया है। सीमा प्रबंधन को लेकर भारत का जिम्मेदार रवैया है। भारत सारे काम एलएसी में अपनी सीमा के अंदर ही करता है, चीन से भी ऐसी उम्मीद हम रखते हैं।
साल 1975 में एलएसी पर चीन ने घात लगाकर हमला किया था, जिसमें चार सैनिक शहीद हुए थे। भारत-चीन सीमा पर करीब 45 साल बाद किसी सैनिक की जान गई है।