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Sagarmanthan: 'भारत प्रमुख जहाज निर्माण राष्ट्र बनने के कगार पर', सागरमंथन संवाद में बोले मंत्री सोनोवाल

Tue, 19 Nov 2024 10:57 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सर्बानंद सोनोवाल ने सागरमंथन संवाद में भारत के प्रमुख जहाज राष्ट्र बनने की दिशा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के पास एक प्रमुख जहाज निर्माण राष्ट्र बनने के लिए समृद्ध प्रतिभा पूल के साथ-साथ संसाधन भी है। हम 2030 तक जहाज निर्माण करने वाले शीर्ष 10 देशों में प्रवेश करने का लक्ष्य बना रहे हैं।
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सर्बानंद सोनोवाल - फोटो : X@@sarbanandsonwal
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विस्तार
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केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत 2030 तक दुनिया के शीर्ष 10 जहाज निर्माताओं में शामिल हो जाएगा। वैश्विक दक्षिण 21वीं सदी में समुद्री व्यापार का स्वरूप निर्धारित करेगा। राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को संपन्न हुए दो दिवसीय ‘सागरमंथन - महान महासागर संवाद’ में उन्होंने समुद्री क्षेत्र के सतत विकास में ज्ञान के इस्तेमाल पर जोर दिया गया।
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केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री ने सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, भारत के पास एक प्रमुख जहाज निर्माण राष्ट्र बनने के लिए समृद्ध प्रतिभा पूल के साथ-साथ संसाधन भी है। हम 2030 तक जहाज निर्माण करने वाले शीर्ष 10 देशों में प्रवेश करने का लक्ष्य बना रहे हैं, जबकि 2047 तक दुनिया के शीर्ष 5 बनने के लिए काम कर रहे हैं। भारत का समुद्री क्षेत्र इसके व्यापार और वाणिज्य की रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करता है, जो देश के व्यापार का लगभग 95 प्रतिशत मात्रा और 70 प्रतिशत मूल्य के हिसाब से संभालता है।

सागरमंथन दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा समुद्री विचार नेतृत्व मंच है। बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय की ओर से ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के साथ साझेदारी में आयोजित, सागरमंथन का उद्देश्य नीली अर्थव्यवस्था, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं, समुद्री रसद और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों के साथ, जीवंत और भविष्य के लिए तैयार समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करता है।
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स्थिरता भारत की समुद्री नीति का स्तंभ
सोनोवाल ने कहा, स्थिरता भारत की समुद्री नीति का एक स्तंभ है और हमारा दृष्टिकोण भारत को दुनिया की जहाज निर्माण राजधानी बनाना है। क्षेत्र में आधुनिकीकरण, डिजिटलीकरण और मशीनीकरण को बढ़ावा देने के हमारे निरंतर प्रयास से, हमने अकुशलता को पीछे छोड़ दिया है। हमें अब विश्वास है कि समृद्ध संसाधन और जीवंत लोकतांत्रिक व्यवस्था हमारे बंदरगाहों को 2047 तक 10,000 मिलियन टन कार्गो संभालने में सक्षम बनाएगी। 12 प्रमुख बंदरगाहों और 200 से अधिक अधिसूचित लघु एवं मध्यवर्ती बंदरगाहों के साथ, देश की बंदरगाह अवसंरचना इसकी बढ़ती अर्थव्यवस्था का आधार है।
 
तकनीकी विशेषज्ञों के साथ हुई चर्चा
केंद्रीय मंत्री ने सर्कुलर ब्लू इकोनॉमी बनाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों से भी बातचीत की। मंत्री ने कहा, ब्लू इकोनॉमी मानवता के विकास का एक महत्वपूर्ण पहलू है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य रचनात्मक समाधान और नई नीति दिशाएं खोजना है जो तटीय समुदायों और महासागर आधारित व्यवसायों को सशक्त बनाती हैं।

इस सत्र में मॉरीशस विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर नदीम नाजुरली, केन्या के राष्ट्रपति के कार्यकारी कार्यालय में ब्लू इकोनॉमी की विशेष दूत और सलाहकार नैन्सी करिगिथू, दक्षिण अफ्रीका के दक्षिण अफ्रीकी अंतरराष्ट्रीय समुद्री संस्थान की शोध निदेशक न्वाबिसा माटोटी, नॉर्वे के एवफॉल नॉर्गे के कार्यक्रम प्रबंधक ओडा कोर्नेलियसन और जर्मनी के गुडकार्बन के वरिष्ठ सलाहकार पीटर औकैम्प ने हिस्सा लिया। संचालन नॉर्वे के क्लीन सी सॉल्यूशंस की सह-संस्थापक कैथरीना फ्रॉस्टैड ने किया।
 
राष्ट्रों की सुरक्षा-समृद्धि गहराई के साथ महासागरों से जुड़ी: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश में कहा कि राष्ट्रों की सुरक्षा और समृद्धि महासागरों के साथ गहराई से जुड़ी है। नाइजीरिया में कैंप ऑफिस से भेजे अपने संदेश में मोदी ने कहा, हम जिस तरह 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने का प्रयास कर रहे हैं, सागरमंथन जैसे संवाद समृद्ध भविष्य के लिए आम सहमति और साझेदारी बनाने के लिए अमूल्य हैं। महासागरों की क्षमता को पहचानते हुए पिछले एक दशक में भारत ने ‘समृद्धि के बंदरगाह’, ‘प्रगति के बंदरगाह’ और ‘उत्पादकता के बंदरगाह’ के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर अपने बंदरगाहों की क्षमता को दोगुना किया है।

समुद्री परंपरा कई सहस्राब्दियों पुरानी- पीएम मोदी
उन्होंने कहा कि बंदरगाहों की दक्षता में वृद्धि, टर्नअराउंड समय में कमी और एक्सप्रेसवे, रेलवे और नदी नेटवर्क के माध्यम से अंतिम मील की कनेक्टिविटी को मजबूत करके, हमने भारत की तटरेखा को बदल दिया है। मोदी ने कहा कि भारत की समुद्री परंपरा कई सहस्राब्दियों पुरानी है और यह दुनिया में सबसे समृद्ध परंपराओं में से एक है।

इसके सात ही पीएम मोदी ने कहा एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित समुद्री नेटवर्क के लिए हमारा दृष्टिकोण - चाहे वह हिंद महासागर हो या हिंद प्रशांत क्षेत्र दुनिया भर में प्रतिध्वनि पा रहा है। हिंद प्रशांत महासागर पहल समुद्री संसाधनों को राष्ट्रों के विकास के लिए एक प्रमुख स्तंभ के रूप में देखती है। पीएम मोदी ने कहा कि महासागरों पर यह संवाद नियम-आधारित विश्व व्यवस्था को और मजबूत करता है तथा राष्ट्रों के बीच शांति, विश्वास और मित्रता को बढ़ाता है।
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