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'चीन की तुलना में भारत कहीं बेहतर साझेदार': ट्रंप की पूर्व सलाहकार बोलीं- बीजिंग अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा

Tue, 09 Jun 2026 08:06 PM IST
निर्मल कांत एएनआई, नई दिल्ली।

सार

अमेरिका की पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विक्टोरिया कोट्स ने कहा कि भारत, अमेरिका के लिए चीन की तुलना में बेहतर साझेदार है और दोनों देशों के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका-चीन संबंधों में टकराव से बचना जरूरी है। भारत के साथ साझेदारी पर कोट्स ने क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-
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विक्टोरिया कोट्स - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विक्टोरिया कोट्स ने कहा कि भारत अमेरिका का चीन की तुलना में कहीं बेहतर साझेदार है। उन्होंने यह भी कहा कि वह लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों की समर्थक रही हैं। 

'चीन की तुलना में भारत बेहतर साझेदार'

विक्टोरिया कोट्स ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें लगता कि भारत अमेरिका के लिए चीन की तुलना में बेहतर साझेदार है। भारत एक बेहतरीन संभावित सहयोगी है। कोट्स ने कहा, भारत पहले से ही एक सहयोगी है। भारत जैसे-जैसे विकासशील देश से आगे बढ़कर वैश्विक महाशक्ति बनेगा, वैसे-वैसे यह साझेदारी अमेरिका के लिए और अधिक लाभकारी होगी। 

'सीधे टकराव से बचना चाहता है अमेरिका'

कोट्स ने कहा कि इस समय अमेरिका चीन के साथ संबंधों को बहुत सावधानी से संभालना चाहता है। उन्होंने कहा, अमेरिका किसी सीधे टकराव से बचना चाहता है, क्योंकि इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया, एक एआई आधारित युद्ध अभ्यास 'ऑपरेशन टाइडल वेव' में यह पाया गया कि अमेरिका-चीन संघर्ष शुरू होते ही वैश्विक जीडीपी में 10 फीसदी की गिरावट आ सकती है, चाहे परिणाम कुछ भी हो। उन्होंने कहा, यह गिरावट वैश्विक मंदी या आर्थिक संकट का कारण बन सकती है, इसलिए इससे बचना जरूरी है। 
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अमेरिका के लिए चीन सबसे बड़ा खतरा है?

कोट्स ने आगे कहा, अमेरिका और चीन दोस्त नहीं हैं। चीन अमेरिका के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा और आर्थिक खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि ट्रंप की चीन यात्रा का मुख्य मुद्दा यह था कि इस बदलाव के समय को कैसे संभाला जाए, जब चीन यह तय कर रहा है कि आगे उसे क्या भूमिका निभानी है।

'पीएम मोदी के साथ ट्रंप के निजी संबंध भरोसेमंद'

उन्होंने कहा,अमेरिका और भारत के बीच संबंध राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी बहुत मजबूत थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनका निजी संबंध वास्तविक और भरोसेमंद है। उन्होंने कहा, जनवरी 2025 की मुलाकात बहुत सफल रही थी। वहां से निकला संयुक्त बयान आगे की साझेदारी का रोडमैप है।

रूसी तेल पर भारत की निर्भरता पर क्या कहा?

कोट्स ने कहा, भारत के रूस के साथ पुराने संबंध, खासकर यूक्रेन मुद्दे पर एक अड़चन हैं। लेकिन इसे पहले भी सुलझाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पहले ईरान के तेल निर्यात को शून्य कर दिया था और बाद में सऊदी अरब और अमेरिका की आपूर्ति से उसकी भरपाई की थी। उन्होंने कहा कि इसी तरह अब अमेरिका को भारत की जरूरतों को समझकर रूसी गैस पर निर्भरता कम करने के रास्ते खोजने होंगे।

उन्होंने आगे कहा, अमेरिका की प्राकृतिक गैस क्षमता बढ़ी है। इससे भारत की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा,जब यह अड़चन दूर होगी तो भारत-अमेरिका साझेदारी और मजबूत होगी। यह केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सुरक्षा, तकनीक और कार्यबल जैसे कई क्षेत्रों में फैलेगी।
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