पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ जगर उगला जा रहा है, परमाणु हथियार संपन्न देश का दंभ भरकर एटमी हमले की धमकी दे रहा है, दूसरी ओर भारत उसी के नागरिकों को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराकर जिंदगी दे रहा है। पाकिस्तानी नागरिक असाध्य या किसी जानलेवा बीमारी की चपेट में आते हैं, और इलाज कराने में सक्षम नहीं होते हैं, तो उन्हें भारत याद आता है।
खाड़ी देशों की तुलना में भारत इनकी पहली पसंद बना है, क्योंकि यहां कम या फिर मुफ्त में भी इनका इलाज हो सकता है। आंकड़े बताते हैं कि बीते छह साल में औसतन हर दूसरे दिन एक पाकिस्तानी ने भारत आकर संजीवनी ली है। इनमें से कई परिवारों ने खुद को गरीब बताकर भारतीय अस्पतालों में 35 से 40 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त में पाया, जिसकी फंडिंग भारत के ही सामाजिक संगठनों ने की। भारत ने तो कोरोना महामारी के दौरान भी पाकिस्तानियों को वीजा दिए, जबकि अपने लोगों को अस्पतालों में बिस्तर नहीं मिल पा रहे थे। विदेश मंत्रालय की एक रिपोर्ट बताती है कि साल 2019 से 2024 के बीच 1228 पाकिस्तानी नागरिकों ने चिकित्सा के लिए वीजा हासिल किया। दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, चेन्नई, मुंबई, बंगलूरू और अहमदाबाद के बड़े प्राइवेट अस्पतालों में आकर इन्होंने अपना उपचार कराया। पाकिस्तान से मरीज आमतौर पर जिन चिकित्साओं के लिए भारतीय अस्पतालों में आते हैं, उनमें कार्डियोलॉजी, ऑर्थोपेडिक, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, कैंसर, अंग प्रत्यारोपण और न्यूरो सर्जरी शामिल हैं। नई दिल्ली स्थित स्वास्थ्य सेवा प्रदाता संघ एएचपीआई के महानिदेशक डॉ. गिरधर ज्ञानी का कहना है कि भारत हर साल पाकिस्तानियों को मौत के जोखिम से बचाने का काम कर रहा है।
180 पाकिस्तानी बच्चों का निशुल्क इलाज
विदेश मंत्रालय की एक अन्य रिपोर्ट बताती है कि 2005 से 2015 के बीच 180 पाकिस्तानी बच्चों का भारत के अस्पतालों में निशुल्क उपचार हुआ। यह योजना इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग की पहल पर लागू की गई। इसके तहत भारत की सरकार ने बच्चे और उसके एक अभिभावक के लिए हवाई यात्रा और रहने का खर्च वहन किया। इनमें से 48 बच्चे हृदय रोगी थे, जिनका इलाज नारायण हृदयालय अस्पताल, बेंगलूरू और दिल्ली के एस्कॉर्ट्स अस्पताल में हुआ। इनके अलावा अप्रैल 2024 में, पाकिस्तान की 19 वर्षीय आयशा रशन ने चेन्नई के एमजीएम अस्पताल में करीब 35 लाख रुपये की जीवन रक्षक हृदय प्रत्यारोपण सर्जरी मुफ्त में करवाई। इसके लिए ऐश्वर्याम ट्रस्ट ने वित्तीय सहायता की। इसी तरह 2022 में पाकिस्तान के सिंध से 13 वर्षीय अफशीन गुल को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में सुधारात्मक रीढ़ की जटिल सर्जरी मुफ्त में हुई।
आतंकी घटनाओं के बाद भी भारत आगे
भारत चिकित्सा मूल्य यात्रा के लिए सबसे किफायती गंतव्यों में से एक है और यूरोप, अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी बिना बीमा वाले लोग इसे पसंद करते हैं। मेडिकल टूरिज्म इंडेक्स 2020-21 के अनुसार, भारत चिकित्सा पर्यटन के लिए 10वां सबसे आकर्षक देश है। भारत सरकार के आव्रजन ब्यूरो के अनुसार, 2023 में लगभग 6,35,000 चिकित्सा पर्यटक भारत आए जो 2022 में 4,75,000 से अधिक है। पाक समर्थित आतंकवाद की हजारों घटनाओं के बावजूद भारत में चिकित्सा पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है जो 2026 तक करीब 11054 हजार करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है।
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