प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका सहित 5 देशों की हालिया यात्रा परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता, आतंकवाद और मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) के कारण चर्चा में है। इस क्रम में उन्हें एमटीसीआर में भारत को प्रवेश का रास्ता साफ कराने और आतंकवाद पर वैश्विक मंच पर पाकिस्तान को बेनकाब करने में सफलता मिली है। विदेश मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही एनएसजी की सदस्यता मामले में भारत ने यूरोप और अमेरिकी देशों को साध कर बड़ी उपलब्धि जरूर हासिल की है, मगर जहां तक मंजिल की बात है तो चीन की बदस्तूर जारी नाराजगी इसकी राह में अब भी रोड़ा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी अपनी इस यात्रा में एमटीसीआर में भारत को प्रवेश कराने में सफलता हासिल कर रक्षा क्षेत्र के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं इसमें कोई शक नहीं की एनएसजी पर पीएम मोदी की पहल ने असर दिखाया है। अमेरिका, स्विटजरलैंड और मैक्सिको जैसे देश खुल कर भारत को एनएसजी की सदस्यता दिलाने के पक्ष में आए हैं। इस मोर्चे पर उन्होंने यूरोपीय देशों को भी करीब करीब साध लिया है। मगर मुश्किल चीन की नाराजगी और सदस्यता हासिल करने के नियम हैं। सदस्य देशों की आम सहमति के बिना सदस्यता हासिल नहीं किया जा सकता। ऐसे में जब चीन को भारत-अमेरिका की बढ़ती नजदीकी हजम नहीं हो रही, तब उसे वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप साध पाना बेहद कठिन होगा। हां, यह जरूर संभव है कि सभी सदस्य देशों के भारत के पक्ष में एकजुटता चीन को दबाव में ला सकता है।
हालांकि चीन भारत को समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को एनएसजी में शामिल करने की शर्त रखेगा। बतौर शशांक भले ही पाकिस्तान के संदर्भ में अमेरिकी नीति तात्कालिक परिस्थितियों पर निर्भर रहती आई है। मगर पीएम मोदी को अमेरिकी कांग्रेस में जिस प्रकार का समर्थन हासिल हुआ है, उससे अमेरिकी सरकार के लिए पाकिस्तान को मदद संबंधित प्रस्ताव सिनेट या प्रतिनिधि सभा में पारित कराने में मुश्किल आ सकती है।
एक अन्य पूर्व विदेश सचिव मुचकुंद दुबे एमटीसीआर में भारत को मिले प्रवेश का रास्ता साफ होने को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं। दुबे कहते हैं यह रक्षा क्षेत्र के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। भारत अब दुनिया के 33 देशों के साथ मिसाइल तकनीकी का आदान प्रदान कर सकेगा। बकौल दुबे इसके बाद भारत मिसाइल का निर्यात कर सकेगा। इससे धीरे धीरे निर्यात के क्षेत्र में भारत अपना दबदबा कायम कर सकता है। दुबे ने भी एनएसजी की सदस्यता को फिलहाल दूर की कौड़ी तो बताया, मगर स्वीकार किया कि इस मामले में भारत सधे कदमों से सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है।
यात्रा की मुख्य उपलब्धियां
-एनएसजी की सदस्यता पर मिला अमेरिका, स्विटजरलैंड, मैक्सिको का साथ
-अमेरिकी कांग्रेस में आतंकवाद पर पाक को किया बेनकाब
-एमटीसीआर में भारत के प्रवेश का रास्ता हुआ साफ
-आतंकवाद पर भारत के रुख को मिला कतर, अफगानिस्तान, अमेरिका, स्विटजरलैंड और मैक्सिको का समर्थन
पीएम मोदी का अमेरिकी दौरा सफल रहा : अमेरिकी राजदूत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे को भारत में अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा ने काफी सफल बताया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के दौरे के दौरान दोनों देशों ने असैन्य परमाणु ऊर्जा समेत रक्षा और व्यापार के क्षेत्र में कई करार किए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरा पूरा करने के बाद अमेरिकी राजदूत ने कहा कि इस दौरे से दोनों देशों के रिश्तों मेें मजबूती आई है। यह हमारी (भारत-अमेरिका) दोस्ती का सबसे सच्चा वसीयतनामा है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ हुई बैठक के अलावा पीएम मोदी की हर मुलाकात के दौरान मौजूद रहे रिचर्ड वर्मा ने बताया कि उनके दौरे के दौरान भारत-अमेरिका के बीच कई अहम करार हुए। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने असैन्य परमाणु समझौता, रक्षा, जलवायु ऊर्जा समेत कई मुद्दों पर करार किए। उन्होंने इस मौके पर यह भी बताया कि पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कई घंटे व्हाइट हाउस में साथ गुजारे।
भारत को अमेरिका का विशेष साझेदार बनाने के लिए लाया कानून
भारत को विशेष वैश्विक साझेदार बनाने के लिए अमेरिकी संसद में दो सांसदों ने एक कानून लाया है। इस कानून के मसौदे में भारत को विशेष दर्जा देने के साथ ही द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए प्रयास करने की हिदायत भी दी गई है।