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विदेशी निवेश लुभाने में चीन से आगे निकला भारत, 20 साल में ऐसा हुआ पहली बार

Sat, 08 Dec 2018 05:40 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत-चीन
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विदेशी निवेश के मामले में यह साल चीन की तुलना के भारत के लिए बेहतर साबित हो रहा है। दक्षिण एशियाई देशों में चीन के मुकाबले भारत में लगभग 20 साल बाद अधिक निवेश होने जा रहा है। ग्लोबल फाइनेंशियल कंटेंट कंसल्टिंग कंपनी डियालॉजिक के आंकड़ों में यह तथ्य सामने आए हैं।

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डियालॉजिक के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अभी तक विदेश कंपनियों ने 38 अरब डॉलर यानी करीब 2700 अरब रुपये का निवेश भारत में करते हुए भारतीय कंपनियों में हिस्सेदारी ली है। वहीं इस दौरान चीन की कंपनियों में विदेशी कंपनियों ने 32 अरब डॉलर यानी करीब 2300 अरब रुपये का ही निवेश किया है। भारत में यह निवेश उपभोक्ता और रिटेल क्षेत्र में अधिक हुआ है।

इस वर्ष भारतीय कंपनियों में 38 जबकि चीनी कंपनियों में 32 अरब डॉलर का हुृआ निवेश

विदेशी निवेश के इन ताजा रुझानों को देखते हुए हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अर्थशास्त्रियों ने उम्मीद जताई थी कि आने वाले वर्षों के दौरान जहां चीन में विदेशी कंपनियों के निवेश में गिरावट देखने को मिलेगी वहीं भारत में 7 फीसदी की अधिक रफ्तार से निवेश को बढ़ता देखा जा सकेगा।

आईएमएफ ने दावा किया था कि वैश्विक निवेशकों के रुझान में यह बदलाव अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के चलते देखने को मिल रहा है। इससे विदेशी निवेशक अब चीन की जगह भारत पर दांव खेलने की तैयारी कर रहे हैं।
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अधिग्रहण से भी फायदा

हाल में अमेरिका में आईटी क्षेत्र की दिग्गज आईबीएम के प्रमुख 8 सॉफ्टवेयर के अधिग्रहण का ऐलान भारतीय आईटी दिग्गज एचसीएल ने किया है। यह सौदा 1.8 अरब डॉलर यानी करीब 1300 करोड़ रुपये में हो रहा है। वहीं हिंदुस्तान यूनीलीवर (एचयूएल) ने नेस्ले को पछाड़ते हुए इंग्लैंड की फार्मा दिग्गज कंपनी गैल्कसोस्मिथक्लाइ (जीएसके) कंज्यूमर के प्रमुख ब्रांड हॉर्लिक्स का अधिग्रहण किया था।

इस अधिग्रहण के लिए एचयूएल को करीब 32,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े। इससे पहले मई में राजस्व के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी वॉलमार्ट ने भारतीय ई-रिटेल दिग्गज फ्लिपकार्ट को खरीद लिया था। इस सौदे को दोनों कंपनियों ने 16 अरब डॉलर यानी करीब एक लाख करोड़ पर किया। वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट की 77 फीसदी हिस्सेदारी ली है।
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