भारत बुधवार को अंतरिक्ष में निचली कक्षा में लाइव सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता रखने वाला चौथा देश बन गया है। इससे पहले यह क्षमता अमेरिका, रूस और चीन के ही पास थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमने जो नई क्षमता हासिल की है, यह किसी के खिलाफ नहीं है बल्कि तेज गति से बढ़ रहे हिन्दुस्तान की रक्षमात्मक पहल है।
ए-सैट यानी एंटी सैटेलाइट मिसाइल एक तरह का अंतरिक्ष हथियार है। इसे सैन्य उद्देश्यों के लिए उपग्रहों को निष्क्रिय और नष्ट करने के लिए बनाया गया है। ये प्रणाली सिर्फ चुनिंदा देशों के पास है और कई इसे अभी भी विकसित ही कर रहे हैं।
हालांकि अभी तक इसका इस्तेमाल किसी लड़ाई में नहीं हुआ है। कुछ देश अंतरिक्ष में अपनी क्षमता पता करने के लिए अपने ही सैटेलाइट को मार गिराते हैं। अभी तक ये प्रणाली केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास ही थी लेकिन अब भारत भी इसमें सफलता हासिल कर चुका है।
अमेरिका
अमेरिका ने यूएसए-193 को नष्ट करने के लिए एसएम-3 मिसाइल का इस्तेमाल किया था।
यूएसए-193 को अमेरिका ने 14 दिसंबर, 2006 को डेल्टा II रॉकेट से लांच किया था। इसके लांच के एक महीने बाद पता चला कि सैटेलाइट फेल हो गई है। फिर जनवरी, 2008 में पता चला कि ये सैटेलाइट हर दिन 1,640 फीट (500 मीटर) की दर से परिक्रमा कर रही है।
14 फरवरी, 2008 को अमेरिका ने आरआईएम-161 मानक की एसएम-3 एबीएम मिलाइल के इस्तेमाल से यूएसए-193 को नष्ट कर दिया। इसे ए-सैट के तौर पर इस्तेमाल किया गया।
रूस
रक्षा अधिकारियों के अनुसार रूस ने 18 नवंबर, 2015 में अपनी एक मिसाइल को मार गिराने के लिए पीएल-19 नुडोल मिसाइल का इस्तेमाल किया था। इसके बाद मई, 2016 में रूस ने नुडोल का दूसरी बार परीक्षण किया। फिर रूस ने तीन अन्य लांच किए। ये लांच दिसंबर, 2016, 26 मार्च, 2018 और 23 दिसंबर, 2018 को किए गए। सितंबर 2018 में मिग-31 द्वारा एक नए प्रकार की ए-सैट मिसाइल को देखा गया था।
चीन
चीन ने 11 जनवरी, 2007 को सफलतापूर्वक एक खराब चीनी मौसम सैटेलाइट एफवाई-1सी को नष्ट कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक इस सैटेलाइट को एससी-19 ए-सैट मिसाइल से मार गिराया गया था। एफवाई-1सी मिसाइल को साल 1999 में लांच किया गया था। इस मिसाइल को मोबाइल ट्रांसपोर्ट इरेक्टर लांचर वेहिकल (टीईएल) से लांच किया गया था।
जानकारी के मुताबिक इसी एससी-19 का 2005, 2006, 2010 और 2013 में परीक्षण किया गया था।