शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन में पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो के बाद अब रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को भारत की ओर से दिए गए न्योते पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। एक पक्ष इसे पाकिस्तान के प्रति भारत की नरमी की शुरुआत के रूप में देख रहा है। हालांकि सच्चाई यह है कि बतौर मेजबान भारत पाकिस्तान के विदेश और रक्षा मंत्री को निमंत्रित कर महज औपचारिकता और बहुपक्षीय प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर रहा है।
अरसे से ठंडे हैं द्विपक्षीय रिश्ते
भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय रिश्ते मुंबई में आतंकी हमले के बाद से ठंडे बस्ते में हैं। साल 2011 में पाकिस्तान की तत्कालीन विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार भारत आई थीं। साल 2015 में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और इसी साल पीएम मोदी बिना किसी कार्यक्रम के पाकिस्तान गए। इसी बीच पहले पठानकोट एयरबेस और इसके बाद उरी में सेना के उपमुख्यालय पर हुए आतंकी हमले ने रिश्ते बेहतर होने की संभावनाओं पर पानी फेर दिया।