दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश और अरुणाचल प्रदेश से जुड़े दो अहम मुद्दों पर भारत का रुख स्पष्ट किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारतीय दूत दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री रहमान से मुलाकात की। भारत ने उन्हें द्विपक्षीय यात्रा के साथ-साथ दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स आउटरीच सत्र के लिए भी आमंत्रित किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत की ओर से बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को द्विपक्षीय यात्रा के लिए आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा उन्हें दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स आउटरीच सत्र में शामिल होने का न्योता भी दिया गया है। जायसवाल ने कहा कि इस मामले से जुड़ी आगे की जानकारी समय-समय पर साझा की जाएगी।
दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत-चीन सीमा संबंधी मामलों पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीमा की स्थिति का असर दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ता है।
चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश को लेकर आई प्रतिक्रिया पर पूछे गए सवाल के जवाब में रणधीर जायसवाल ने भारत की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह एक ऐसी वास्तविकता है जो स्वयं स्पष्ट है और इस निर्विवाद सच्चाई को कुछ भी नहीं बदल सकता।
#WATCH | Delhi | On ANI question regarding China's response on Arunachal Pradesh, MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, "Arunachal is inalienable and integral part of India and this is a fact which is self-evident. At the same time, let me also underline that nothing can change… pic.twitter.com/aPAKQ4swiP
— ANI (@ANI) August 11, 2026
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) की स्थिति पर भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि भारत वहां के घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर भारत गंभीर चिंता व्यक्त करता रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना चाहता है। इसी दिशा में विदेश सचिव ने भूटान और श्रीलंका का दौरा किया था। जायसवाल ने बताया कि दोनों दौरों से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की गई है। भारत का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में इन देशों के साथ संबंधों और सहयोग को और गहरा करना है। उन्होंने कहा कि विकास साझेदारी इस सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत भारत अपने आसपास के देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। विकास साझेदारी के अलावा सहयोग के अन्य क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जायसवाल ने बताया कि भारत ने ब्रिक्स देशों और ब्रिक्स के साझेदार देशों को यहां होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। इसके अलावा क्षेत्रीय समूहों के कई नेताओं को आउटरीच सत्र के लिए भी निमंत्रण भेजा गया है।
स्लोवेनिया की राजधानी ल्युब्लियाना में खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा भारतीय दूतावास में तोड़फोड़ किए जाने के मामले पर भी विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने घटना की कड़ी निंदा की है और स्लोवेनिया सरकार के सामने यह मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि वियना कन्वेंशन के तहत राजनयिक परिसरों और राजनयिक गतिविधियों की पूरी तरह सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
भारत ने दिल्ली स्थित स्लोवेनियाई दूतावास के साथ-साथ स्लोवेनिया के विदेश मंत्रालय के सामने भी यह मामला उठाया है। भारत ने घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने और कानून के मुताबिक उचित सजा देने की मांग की है।
पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़े हालिया समझौते पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत इस क्षेत्र में जारी घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है। जायसवाल ने बताया कि संबंधित समझौते के प्रभावों की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके प्रभावों को भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के नजरिए से भी देखा जा रहा है। भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में सभी जरूरी कदम उठाएगा।