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पूर्वी हिमालय में भारतीय सेना का पराक्रम: आयोजित की अंतरराष्ट्रीय सैन्य प्रतियोगिता, सात देशों ने लिया हिस्सा

Tue, 24 Feb 2026 05:38 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी

सार

भारतीय सेना ने पहली बार पूर्वी हिमालय में आईएमएसीसी 2026 आयोजित किया, जिसमें भारत समेत सात देशों की 12 टीमें शामिल हुईं। प्रतियोगिता में ड्युथलॉन और ट्रायथलॉन जैसे चुनौतीपूर्ण इवेंट हुए, जो सैनिकों की फिटनेस, मानसिक सहनशीलता, नेतृत्व और टीमवर्क को परखते हैं।

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भारतीय सेना - फोटो : एक्स@adgpi
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विस्तार
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भारतीय सेना ने पूर्वी हिमालय की तलहटी में पहली अंतरराष्ट्रीय मिलिट्री एडवेंचर चैलेंज कप (IMACC) 2026 का आयोजन किया। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, इस प्रतियोगिता में भारत समेत सात अन्य देशों ने हिस्सा लिया। इसमें भूटान, ब्राजील, कजाकिस्तान, किर्गिजस्तान, नेपाल, सऊदी अरब और श्रीलंका की टीमें शामिल थीं। भारतीय पक्ष से सेना की दो टीमें, भारतीय वायु सेना (आईएएफ), भारतीय तटरक्षक बल और इंडो-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की एक-एक टीम ने प्रतियोगिता में भाग लिया।

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मुख्य मुकाबला 18 से 23 फरवरी तक आयोजित हुआ, जबकि विजेताओं का समापन समारोह बुधवार को होगा। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि आईएमएसीसी 2026 का मकसद सैनिकों की मुख्य क्षमताओं शारीरिक फिटनेस, मानसिक सहनशीलता, टीमवर्क, नेतृत्व और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता को परखना था। प्रतियोगिता कठिन पर्वतीय इलाकों में आयोजित की गई, जिससे असली ऑपरेशन के हालात झलकते हैं।

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इस प्रकार के प्रतियोगिताओं का आयोजन
बता दें कि प्रतियोगिता में ड्युथलॉन और ट्रायथलॉन जैसी चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिता आयोजित की गईं। ड्युथलॉन में 21.1 किलोमीटर दौड़ और 59.5 किलोमीटर साइकिलिंग शामिल थी। ट्रायथलॉन में 21.1 किलोमीटर दौड़, 59.5 किलोमीटर साइकिलिंग और 32.5 किलोमीटर राफ्टिंग की गई। ट्रायथलॉन में भारतीय सेना की दोनों टीमें, साथ ही नेपाल और श्रीलंका की टीमें भाग लीं। बाकी देशों की टीमें ड्युथलॉन में शामिल हुईं।

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सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन
प्रवक्ता ने कहा कि हर दिन दो टीमें भाग लेती रहीं और सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन किया गया। चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह तैयार थी और कोई गंभीर चोट नहीं आई। साथ ही, प्रतियोगिता के दौरान हर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिसमें स्थानीय धरोहर और पारंपरिक कला का प्रदर्शन हुआ।

इसका मकसद देशों के बीच दोस्ती और आपसी समझ को मजबूत करना था। रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सैन्य खेल (सीआईएसएम) ने दुनिया भर की सेनाओं के बीच विश्वास और सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत पहले भी 2007 में चौथे सीआईएसएम मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स की मेजबानी कर चुका है।

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