सिंधु जल समझौता रद्द करने को बेशक सरकार ने तेवर दिखा दिए हों, लेकिन समझौता रद्द होने की सूरत में उस पानी के प्रबंधन की कोई तैयारी नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप का बयान आने के एक दिन बाद केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने समझौते की बारीकियों को समझने का प्रयास किया। सूत्रों के अनुसार जल संसाधन मंत्रालय ने अभी इस दिशा में कुछ सोचा नहीं है।
नदी जल का बंटवारा दो देशों के बीच होने के कारण इस पर कोई भी निर्णय लेने का अधिकार विदेश मंत्रालय अथवा कैबिनेट के पास है। जल संसाधन मंत्रालय महज विदेश मंत्रालय या कैबिनेट के निर्देशों का पालन करेगा। उसका कार्य महज तय मानक के अनुसार नदी से जल को छोड़ना और बंद करना है। पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान तो दे दिया है, मगर इस पर अमल करने में कई व्यावहारिक कठिनाइयां हैं।