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फोर्ब्स ने दिखाया आईना: बताया भारत से मीलों पीछे है पाकिस्तान

Wed, 05 Oct 2016 02:53 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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अर्थव्यवस्था
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बीते कुछ साल में भले ही पाकिस्तान का इक्विटी मार्केट भारत की तुलना में बढ़ी हो, लेकिन मुख्य अर्थव्यवस्था मेट्रिक में उसे भारत के करीब पहुंचने में लंबा सफर तय करना पड़ेगा। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा जारी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में इसकी रैंकिग प्रकाशित की गई है।
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इसके मुताबिक, वैश्विक स्तर पर भारत, पाकिस्तान की तुलना में ज्यादा प्रतिस्पर्धी है। साल 2016 में भारत ने तेजी, बहुत तेजी से 39 रैंक से छलांग लगाते हुए 16 वीं रैंक पर जगह बनाई है।  इसकी वजह से ही चाइना और भारत के बीच गैप भी कम हुआ है।

कुछ वर्षों में पाकिस्तान ज्यादा प्रतिस्पर्धी हुआ है, लेकिन उसकी रफ्तार अब भी धीमे है। वह वर्ल्ड फोरम रैंकिंग में 122 वें स्थान के साथ अंतिम पायदान पर बना हुआ है।
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देश                      2016                          2015

भारत                      39                             55
चीन                       28                             28
पाकिस्तान                 122                          126



इंडेक्स/फंड                                                                        12-महीने का परफॉर्मेन्स

Global X MSCI Pakistan (NYSE:PAK)                                    16.90%
iShares S&P India 50 (NASDAQ:INDY)                                     6.16%
iShares MSCI Emerging Markets  (NYSE:EEM                          10.67%
 
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12 पिलर्स पर किया है अवलोकन

डेमो पिक
विश्व आर्थिक मंच ने 144 इंडिकेटर्स को कंबाइन किया, जिसने उत्पादन और लंबी अवधी की खुशहाली को आकार देना का कन्शेप्ट तैयार किया। इसमें 12 पिलर्स का ग्रुप है, जिसमें इंस्टीट्यूशन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, मैक्रोइकनॉमिक माहौल, स्वास्थ्य और प्राइमरी शिक्षा, उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण, समानों के मार्केट दक्षता, श्रम बाजार दक्षता, आर्थिक बाजार वृद्धि, तकनीकी तत्परता, बाजार आकार, व्यापार परिष्कार और नवाचार शामिल हैं।


भारत ने हर कैटेगरी में विकास किया है। वहीं, पाकिस्तान ज्यादातर कैटेगरी में विकास करने में असफल रहा है। इसमें खासतौर पर मैक्रोइकोनॉमिक पर्यावरण, स्वास्थ्य और प्राइमरी शिक्षा शामिल हैं। इनमें पाकिस्तान दूसरे दक्षिए एशियाई देशों से भी पीछे है। यह पाकिस्तान की इक्विटी मार्केट की रैली की स्थिरता पर सवाल खड़ा करता है।  
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