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मोदी की डैम डिप्लोमेसी से अफगानिस्तान में बढ़ेगी भारत की लोकप्रियता?

Sat, 04 Jun 2016 02:19 PM IST
देवांशु गौड़/ बीबीसी मॉनिटरिंग

सार

  • अफगानिस्तान में 'सॉफ्ट पॉवर' के रूप में भारत दे रहा दखल: विशेषज्ञ
  • अफगानिस्तान में भारत सबसे लोकप्रिय साझेदार 
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मोदी ने दिया अफगानिस्तान को 'तोहफा
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विस्तार
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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफगानिस्तान के हैरात में 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 2,000 करोड़ रुपए) की लागत से बनने वाले सलमा बांध परियोजना का उद्घाटन किया। गौरतलब है कि वह पांच देशों की यात्रा पर हैं और इसकी शुरुआत अफगानिस्तान दौरे से हुई है।
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भारत और अफगानिस्तान के बीच रिश्ते लंबे समय से काफी करीबी रहे हैं और भारत में नरेंद्र मोदी की सरकार के बाद भी इसमें कोई बदलाव नहीं आया है लेकिन इस रिश्ते से पाकिस्तान बहुत सहज नहीं है। अफगानिस्तान में जारी विकास कार्यों में भारत की अहम भूमिका की वजह से वहां भारत की काफी लोकप्रियता है।

भारत ने जो निर्माण कार्य अफगानिस्तान में किए हैं, उनमें अब सलमा बांध का नाम भी जुड़ गया है। इस बांध की मदद से बिजली का उत्पादन किया जाएगा साथ ही साथ ये सिंचाई में भी मदद करेगा। जनवरी में नरेंद्र मोदी ने अफगानिस्तान में संसद भवन का उद्घाटन किया था।
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इससे पहले भारत ने फुल-ए-खुमरी पॉवर लाइन का निर्माण किया था जिसकी मदद से काबुल को बिजली की आपूर्ति की जाती है। भारत ने दक्षिण पश्चिम अफगानिस्तान के शहर जेरांज और ईरानी सीमा के नजदीक स्थित शहर डेलाराम को जोड़ने वाले हाइवे के पुनर्निमाण में भी मदद की थी। 

अफगानिस्तान में 'सॉफ्ट पॉवर' के रूप में भारत दे रहा दखल: विशेषज्ञ

सलमा डैम
हाल ही में भारत ने ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह के निर्माण को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस बंदरगाह की मदद से अफगानिस्तान का सामान सीधे भारत तक पहुंच पाएगा। अब तक भारतीय चीजे पाकिस्तान के जरिए अफगानिस्तान तक पहुंचती हैं।

तालिबान के सत्ता से बाहर होने के बाद भारत ने अफगानिस्तान के पुनर्निमाण के लिए दो अरब अमेरिकी डॉलर की मदद देने का वचन दिया था। यह दक्षिण एशिया के किसी भी देश की तरफ से सबसे बड़ी पेशकश थी। भारत सालाना एक हजार अफगानी छात्रों को वजीफा मुहैया कराता है और भारत में पढ़ने का खर्च उठाता है।

विशेषज्ञ भारत की इन कोशिशों को अफगानिस्तान में 'सॉफ्ट पॉवर' के रूप में दखल के तौर पर देखते हैं। हालांकि अफगानिस्तान और भारत के बीच सुरक्षा मामले को लेकर बहुत करीबी ‌रिश्ते नहीं नजर आते हैं। अफगानिस्तान चाहता है कि भारत उसे वायु सेना से जुड़े महत्वपूर्ण उपकरण मुहैया कराए लेकिन भारत ने अब तक सिर्फ चार फौजी हैलिकॉप्टर ही मुहैया कराए हैं। भारत और अफगानिस्तान के बीच संबंधों में भौगोलिक स्थिति की बहुत बड़ी भूमिका है।

अफगानिस्तान की सीमा भारत से नहीं मिलती है, लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान की सीमा से यह सटा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह भारत और पाकिस्तान के लिए मजबूती और कमजोरी दोनों है। चूंकि पाकिस्तान, अफगानिस्तान का बिल्कुल नजदीक का पड़ोसी देश है इसलिए उसे इस बात का भौगोलिक फायदा तो मिला हुआ है, लेकिन अफगानिस्तान में पाकिस्तान उतना लोकप्रिय नहीं है। 
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अफगानिस्तान में भारत सबसे लोकप्रिय

पाइपलाइन
हालिया बीबीजी-गैलप सर्वे में भारत, अफगानिस्तान में 62 अंकों के साथ सबसे लोकप्रिय साझेदार है, जबकि पाकिस्तान का स्थान 3. 7 फीसदी के साथ नीचे आता है। पाकिस्तान का स्थान इस सर्वे में इस्लामिक स्टेट से भी नीचे है। इस्लामिक स्टेट की रेटिंग इस सर्वे में 5.8 दर्ज की गई है।

अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान के रिश्ते बहुत हद तक पाकिस्तानी फौज के हाथों से नियंत्रित होते हैं। पाकिस्तानी फौज परंपरागत रूप से अफगानिस्तान में 'रणनीतिक' तौर पर भारत के खिलाफ काम करती रही है।

बड़े पैमाने पर यह माना जाता है कि पाकिस्तान इस रणनीति के तहत अफगानिस्तान में इस्लामी चरमपंथी समूहों मसलन तालिबान को बढ़ावा देता है। हालांकि इस रणनीति ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों देशों को नुकसान पहुंचाया है और क्षेत्र में इस्लामी अतिवाद को बढ़ावा दिया है। इसने पाकिस्तान को अफगानिस्तान में अलोकप्रिय बनाया है।

अब जब मोदी ने सलमा बांध का उद्घाटन कर दिया हैं तो पाक-अफगान संबंध के आसार बेहतर नजर नहीं आ रहे हैं। पाकिस्तान में अमेरिकी ड्रोन हमले में तालिबान नेता मुल्ला अख्तर मंसूर की मौत ने अफगानिस्तान शांति प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इस शांति प्रक्रिया में अफगानिस्तान, पाकिस्तान, अमेरिका और चीन शामिल थे। 
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