वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी शुक्रवार को भारत को दी गई। एफएटीएफ एक वैश्विक संस्था है, जो धनशोधन और आतंकवाद के लिए धन जुटाने जैसी गतिविधियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तय करती है। भारत वर्ष 2010 से इस ताकतवर अंतरराष्ट्रीय संस्था का सदस्य है। पहली बार भारत को इस पद की जिम्मेदारी मिली है।
बयान में क्या कहा गया?
एक बयान के अनुसार, पेरिस स्थित एफएटीएफ के मुख्यालय में आयोजित पूर्ण बैठक के समापन पर केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल को संस्था का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया।
विवेक अग्रवाल कौन हैं?
विवेक अग्रवाल 1994 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं। वह मध्य प्रदेश कैडर से ताल्लुक रखते हैं। वह पहले भी एफएटीएफ में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख के रूप में काम कर चुके हैं।
एफएटीएफ ने अपने बयान में कहा, सदस्यों ने ब्रिटेन के अगले अध्यक्षीय कार्यकाल के लिए तय की गई प्राथमिकताओं को मंजूरी दी और भारत के विवेक अग्रवाल को जुलाई 2026 से जून 2027 तक के लिए एफएटीएफ का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया।
पेरिस में एकत्र हुए प्रतिनिधि और पर्यवेक्षक
17 से 19 जून के दौरान 200 से अधिक देशों और क्षेत्रों के प्रतिनिधि तथा पर्यवेक्षक पेरिस में एकत्र हुए। उन्होंने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की सुरक्षा और विश्वसनीयता के सामने मौजूद खतरों पर चर्चा की। एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि विवेक अग्रवाल ब्रिटेन के नागरिक गाइल्स थॉमसन का स्थान लेंगे। थॉमसन एक जुलाई 2025 से इस पद पर कार्यरत हैं।
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सरकार ने इस नियुक्ति पर क्या कहा?
इस बीच, वित्त मंत्रालय ने इस नियुक्ति को भारत के लिए एक ऐतिहासिक सम्मान बताया। मंत्रालय ने कहा कि यह धनशोधन और आतंकवादी वित्तपोषण के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत की बढ़ती नेतृत्वकारी भूमिका की पहचान है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, इस नियुक्ति से एक भारतीय अधिकारी को धनशोधन रोकने और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ मानक तय करने वाली दुनिया की सबसे अहम संस्था के शीर्ष नेतृत्व में स्थान मिला है।
विवेक अग्रवाल ने क्या कहा?
साल 2024 में जब भारत की अंतिम म्यूचुअल इवैल्यूएशन रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी, उस समय विवेक अग्रवाल केंद्रीय वित्त मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे। उस दौरान उनके पास वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (एफआईयू-इंडिया) के निदेशक की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी थी। विवेक अग्रवाल ने कहा, यह नियुक्ति भारत के सामूहिक प्रयासों और धनशोधन तथा आतंकवादी वित्तपोषण के खिलाफ हमारी मजबूत व्यवस्था की अंतरराष्ट्रीय मान्यता है।
राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि यह भारत के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था की पारदर्शिता और मजबूती बढ़ाने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता फिर से साबित होती है।
एफएटीएफ के अध्यक्ष का कार्यकाल दो वर्ष का होता है और उपाध्यक्ष संस्था के उद्देश्यों को पूरा करने में अध्यक्ष की सहायता करता है। साल 2024 की रिपोर्ट में एफएटीएफ ने भारत की सराहना करते हुए कहा था कि अवैध वित्तीय गतिविधियों से निपटने के लिए भारत की ओर से बनाई गई व्यवस्था प्रभावी है और मनी धनशोधन तथा आतंकवादी वित्तपोषण को रोकने के प्रयासों के अच्छे परिणाम मिल रहे हैं।
पाकिस्तान की बढ़ी चिंता
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब भारत लगातार सीमा पार आतंकवाद के वित्तपोषण और अवैध धन के नेटवर्क के खिलाफ वैश्विक स्तर पर कड़ा रुख अपनाने की वकालत कर रहा है। ऐसे में संस्था के शीर्ष नेतृत्व में भारत की बढ़ती भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी साख और प्रभाव बढ़ने के रूप में देखा जा रहा है।
एफएटीएफ के नेतृत्व में भारत की मौजूदगी से आतंकवाद को आर्थिक मदद पहुंचाने वाले नेटवर्क पर निगरानी और सख्ती के प्रयासों को और बल मिल सकता है। पड़ोसी देश पाकिस्तान पहले कई बार एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में रह चुका है और उसे आतंकवादी संगठनों के वित्तपोषण पर कार्रवाई को लेकर लगातार जांच का सामना करना पड़ा है। ऐसे में इस अहम संस्था के शीर्ष नेतृत्व में भारतीय को जिम्मेदारी मिलने के बाद पाकिस्तान की भी चिंताएं बढ़ गई हैं।