वैश्विक कूटनीति के मंच से भारत के लिए बहुत बड़ी खबर आ रही है। फ्रांस में अगले हफ्ते होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। फ्रांसीसी राजनयिक सूत्रों ने साफ किया है कि इस वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका बेहद केंद्रीय होने वाली है। भारत को जी7 के सभी ट्रैक्स में शामिल होने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।
पश्चिम एशिया संकट पर महामंथन
फ्रांसीसी सूत्रों के अनुसार, अगले सप्ताह होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन में पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट पर एक विशेष बैठक होगी। इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक में भारत और अमेरिका के शीर्ष नेता मौजूद रहेंगे। इनके साथ ही कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेता भी इस चर्चा का हिस्सा बनेंगे।
राजनयिक सूत्रों ने इस बैठक के एजेंडे को लेकर बड़ा बयान दिया है। सूत्रों ने कहा है कि इस समय समुद्री मार्गों पर मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। फ्रांसीसी सूत्रों ने कहा, 'हम युद्ध का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन इसका असर हम सब पर पड़ रहा है।' भारत इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षित व्यापारिक मार्गों का हमेशा से प्रबल समर्थक रहा है।
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भारत-फ्रांस संबंधों में नया विश्वास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी दौरे से ठीक पहले फ्रांसीसी राजनयिकों का यह बयान दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों की गवाही देता है। फ्रांसीसी सूत्रों ने कहा, 'भारत हमारे लिए शीर्ष प्राथमिकता है। हमारे बीच विशेष संबंध हैं।' फ्रांस का मानना है कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और आत्मविश्वास का स्तर बहुत ऊंचा हो चुका है। अब दोनों देश किसी भी मुद्दे पर बेहद सहजता से बात कर सकते हैं।
फ्रांस ने भारत की वैश्विक क्षमता की तारीफ करते हुए कहा कि जब भारत अपनी समस्याओं का समाधान खोजेगा, तो वह पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बनेगा। फ्रांस ने भारत की जी20 अध्यक्षता की ऐतिहासिक सफलता को भी याद किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के अध्यक्ष के रूप में भारत का अपना एक स्वतंत्र एजेंडा है, जिसका वे पूरा सम्मान करते हैं।
रक्षा क्षेत्र में अब बराबरी की डील
रक्षा और तकनीकी समझौतों को लेकर फ्रांस ने बेहद क्रांतिकारी रुख अपनाया है। फ्रांसीसी राजनयिकों ने साफ कर दिया है कि भारत और फ्रांस के बीच अब कोई ग्राहक और विक्रेता का पारंपरिक रिश्ता नहीं रह गया है। यह पूरी तरह से बराबरी का संबंध है। फ्रांस के अनुसार, अब दोनों देशों के बीच जो भी रक्षा सौदे होंगे, उनमें 'मेक इन इंडिया' अनिवार्य रूप से शामिल रहेगा। यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है।