सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि भारत कंटेंट क्रिएटर्स की अर्थव्यस्था को बढ़ावा देने पर फोकस कर रहा है, जिससे देश की समृद्ध धरोहर, संस्कृति, भाषाओं और साहित्यिक विविधता को वैश्विक स्तर पर दिखाया जा सके।
पणजी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) के शुभारंभ के मौके पर एक वीडियो संदेश के जरिए वैष्णव ने कहा कि भारत तकनीकी और कंटेंट क्रिएटर्स के पारिस्थितिकीतंत्र के विकास के साथ मीडिया और मनोरंजन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा, हम भारत में इस समय कंटेंट क्रिएटर्स की अर्थव्यवस्था को बहुत्व महत्व दे रहे हैं। यहां एक जीवंत क्रिएटर्स अर्थव्यवस्था है, जो भारत की समृद्ध धरोहर, भारतीय व्यंजनों, संस्कृति और भाषाओं व साहित के रत्नों को पेश करने के लिए कंटेंट बना रहे हैं। आईएफएफआई के 55वें संस्करण का शुभारंभ श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम में हुआ।
वैष्णव ने एक लेख में कहा कि भारत की रचनात्मक (क्रिएटिव) अर्थव्यवस्था अब 30 अरब डॉलर (करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये) की इंडस्ट्री बन गई है, जो जीडीपी में करीब 2.5 फीसदी का योगदान करती है और आठ फीसदी श्रमिकों को रोजगार प्रदान करती है।
उन्होंने कहा, इंफ्लुएंसर मार्केटिंग क्षेत्र 3,375 करोड़ रुपये का है और दो लाख से अधिक फुल टाइम कंटेंट क्रिएटर्स के साथ यह उद्योग भारत की वैश्विक आकांक्षाओं को साकार करने में एक ताकत चुका है। वैष्णव ने यह भी कहा कि अब गुवाहाटी, कोच्चि और इंदौर जैसे शहर भी क्रिएटिव हब बन रहे हैं।
भारत के 110 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता और 70 करोड सोशल मीडिया उपभोक्ता क्रिएटिविटी के लोकतांत्रिकीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्रिएटिव अर्थव्यवस्था का प्रभाव जीडीपी वृद्धि से कहीं अधिक है और यह पर्यटन, तकनीकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में असर डाल रहा है, क्योंकि यह सहायक उद्योगों का समर्थन कर रहा है।
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