नेपाल में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मचे सियासी उथलपुथल पर भारत पैनी नजर बनाए हुए है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के ओली और प्रचंड धड़े के बीच बढ़ी तल्खी के बाद नेपाल में मध्यावधि चुनाव के आसार हैं। भारत को उम्मीद है कि मध्यावधि चुनाव की स्थिति में गैरकम्युनिस्ट दल नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व में एकजुट हो सकते हैं।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 13 दिनों के अंदर संसद सत्र बुलाने का निर्देश दिया है। प्रतिनिधि सभा की मौजूदा स्थिति में नई सरकार का गठन संभव नहीं दिख रहा है। चीन दरअसल ओली और प्रचंड धड़ों के बीच सहमति बनाने में जुटा है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि वहां दोनों के बीच सहमति बनाने और शर्मा या ओली के इतर नए चेहरे को पीएम पद की कमान देने पर भी मंथन हो रहा है। अगर दोनों धड़ों में सहमति बनी तभी मध्यावधि चुनाव को टाला जा सकता है। हालांकि ओली और प्रचंड की लड़ाई इस स्तर तक पहुंच गई है कि दोनों के बीच समझौते की संभावना बेहद कम है। दोनों धड़ों ने अलग-अलग बैठक कर ओली-प्रचंड को पार्टी से बाहर निकालने की घोषणा की है।
विपक्षी एकता की सुगबुगाहट
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के दोनों धड़ों में जारी घमासान के बीच गैरकम्युनिस्ट दलों को नेपाली कांग्रेस एक मंच पर लाने में जुटी है। नेपाली कांग्रेस के नेता समाजवादी पार्टी सहित कई अन्य दलों के लगातार संपर्क में हैं। भारत को भी मध्यावधि चुनाव की स्थिति में गैरकम्युनिस्ट दलों में सहमति बनने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि साल 2018 में नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) का विलय हुआ था। इसके बाद नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी सबसे ताकतवर हो गई थी।