डेनमार्क के राजदूत रस्मुस क्रिस्टेनसेन ने कहा कि भारत किसी भी तरह से 'मृत अर्थव्यवस्था' नहीं है, बल्कि यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा कि इसका सबूत यह है कि यूरोपीय संघ और भारत मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत कर रहे हैं। क्रिस्टेनसेन के अनुसार, भारत निवेश के लिए एक बेहतरीन जगह है और अगर यह अर्थव्यवस्था कमजोर होती तो ऐसा नहीं होता।
जब उनसे पूछा गया कि क्या यह समझौता इस साल के अंत तक हो जाएगा, तो उन्होंने कहा कि पहले इस पर जल्दी बातचीत की जरूरत महसूस नहीं की गई, लेकिन अब यह तात्कालिकता है। मुझे भरोसा है कि समझौता जल्द हो जाएगा।
राजदूत ने आगे कहा, हम नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के पक्ष में हैं, जहां बड़े देश छोटे देशों को यह न बताएं कि उन्हें क्या करना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, हम भारत के साथ एक ऐसा समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं जो दोनों के लिए फायदेमंद हो, न कि ऐसा जिसमें अपनी आर्थिक ताकत के दम पर आपको कोई ऐसा काम करने पर मजबूर करें जो आप नहीं करना चाहते। यूरोप की सोच यह है कि जब भी हम बातचीत करते हैं, तो ईमानदारी से करते हैं, लेकिन साथ ही देशों को वह करने के लिए भी प्रेरित करते हैं जो शायद वे खुद नहीं करना चाहते।
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उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा, उस हमले के बाद भारत ने कई देशों से समर्थन मांगा, क्योंकि आपका मानना था कि आप पर ऐसे आतंकियों ने हमला किया, जिनके कुछ और जगहों से भी संबंध हो सकते हैं। आपने इसे अस्तित्व का सवाल माना। यूरोप के नजरिए से देखें, तो रूस का एक संप्रभु देश पर हमला भी ऐसा ही अस्तित्व का संकट है, क्योंकि अगर कोई देश यूं ही दूसरे देश पर हमला कर सकता है, तो अगला शिकार कौन होगा? हमारे लिए यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है।
उन्होंने कहा, रूस, यूक्रेन में जो कुछ कर रहा है, उसके लिए उसे प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। हमें चिंता होती है जब हम देखते हैं कि रूस को युद्ध के लिए जरूरी सामान दूसरे देशों से मिलता है, ठीक वैसे ही जैसे भारत को पहलगाम हमले के बाद उम्मीद थी कि दूसरे देश आतंकियों को मदद न दें।