आबादी के एक बड़े हिस्से को टीकाकरण के दायरे में लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने वैक्सीन के लिए शर्तें हटा ली हैं। मोदी सरकार ने भारत में ज्यादा से ज्यादा वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए फैसला लिया है कि अब दूसरे देशों में आपातकालीन इस्तेमाल (ईयूए) की अनुमति प्राप्त कर चुकीं वैक्सीन भारत में भी प्रयोग में लाई जा सकती हैं।
हालांकि इन वैक्सीन का विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सूची में शामिल होना भी जरूरी है। साथ ही भारत में जिन 100 लोगों को सबसे पहले यह वैक्सीन लगेगा, उन्हें कम से कम सात दिनों की निगरानी में रखा जाएगा। इसके बाद ही अन्य लोगों को यह मिल सकेगी।
सरकार के इस फैसले से सबसे बड़ी राहत अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर और मॉडर्ना को मिल सकती हैं। फाइजर ने भारत में आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति पाने के लिए लंबे समय तक इंतजार किया था, लेकिन दो महीने पहले ही अपना आवेदन वापस ले लिया था।
जानकारी के अनुसार अमेरिका, इंग्लैंड, जापान सहित कई देशों में अलग-अलग फॉर्मा कंपनी की वैक्सीन आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति ले चुकीं हैं। अभी तक नियम था कि इन कंपनियों को अगर भारत में भी अनुमति लेनी है तो पहले भारतीय अस्पतालों में आकर दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण करना होगा। इसके परिणाम की समीक्षा करने के बाद विशेषज्ञ समिति (एसईसी) की सिफारिश के आधार पर ही आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब अगर किसी ने अमेरिका या अन्य किसी देश में परीक्षण किया है और उसे अलग-अलग देशों में आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति मिल चुकी है तो भारत में भी उसे मौका दिया जाएगा।
दरअसल, पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया कोविशील्ड को तैयार कर रहा है लेकिन यह वैक्सीन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और अमेरिकी दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने तैयार की है। भारत में इस वैक्सीन को अनुमति देने से पहले 1600 से अधिक लोगों पर परीक्षण हुआ था। ठीक इसी तरह रूस की स्पूतनिक वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति मिल चुकी है लेकिन इससे पहले स्पूतनिक वैक्सीन का भारत में दूसरा और तीसरे चरण का परीक्षण किया गया था।
वैक्सीन के सहारे दूसरी लहर से लड़ाई
नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि संक्रमण की इस दूसरी लहर से बचाव करने के लिए वैक्सीन बड़ा विकल्प है। इसीलिए वैक्सीन को लेकर गठित नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ने यह फैसला लिया है कि अगर यूएसएफडीए, यूरोपियन मेडिसिन जैसी एजेंसियों से वैक्सीन को ईयूए मिल चुका है तो उसे भारत में भी स्वीकार किया जाएगा, लेकिन पूरे देश में इसे उपलब्ध कराने से पहले 100 लोगों को डोज देकर इसके प्रभाव को जानना होगा।
डॉ. पॉल का कहना है कि वैक्सीन सुरक्षा और असर को लेकर भारत सरकार लगातार गंभीरता बरत रही है, लेकिन देश में टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए अन्य वैक्सीन को उपलब्ध कराना भी बहुत जरूरी है।