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चेतावनी: भारत में पर्यावरणीय संकट गंभीर, देश में हर साल निकल रहा 1.566 करोड़ टन जहरीला कचरा

Fri, 24 Apr 2026 07:33 AM IST
Nirmal Kant अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।

सार

भारत में हर साल बड़ी मात्रा में खतरनाक औद्योगिक कचरा पैदा हो रहा है, जबकि आधिकारिक दस्तावेजों में बहुत कम प्रदूषित स्थल दर्ज हैं, जिससे बड़े स्तर पर प्रदूषण की अनदेखी की आशंका है। एक अध्ययन में यह जानकारी निकलकर सामने आई है। पढ़िए रिपोर्ट-
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कचरा - फोटो : संवाद
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विस्तार
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भारत में हर साल 1.566 करोड़ मीट्रिक टन खतरनाक औद्योगिक कचरा पैदा हो रहा है। यह हाल तब है जबकि आधिकारिक रिकॉर्ड में पूरे देश में 200 से भी कम प्रदूषित या संभावित रूप से प्रदूषित स्थल दर्ज हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के नेतृत्व में किए गए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस बड़े अंतर को गंभीर चिंता का विषय बताया है।
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शोधकर्ताओं के अनुसार इसका अर्थ है कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे प्रदूषित इलाके मौजूद हो सकते हैं, जिनकी अभी तक पहचान नहीं हुई है। एनवायर्नमेंटल डेवलपमेंट पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार यह समस्या केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव स्वास्थ्य, भूजल, खाद्य सुरक्षा और वन्यजीवों के लिए भी दीर्घकालिक खतरा बन सकती है। प्रदूषित भूमि वे स्थान होते हैं जहां मिट्टी, भूजल या जमीन के नीचे जहरीले रसायन जमा हो जाते हैं। यह स्थिति आमतौर पर उद्योगों, फैक्ट्रियों, खनन गतिविधियों और खतरनाक कचरे के गलत निपटान के कारण पैदा होती है। इन जहरीले पदार्थों में सीसा, पारा और कैडमियम जैसी भारी धातुएं शामिल होती हैं। भारी धातुएं ऐसे तत्व होते हैं जो कम मात्रा में भी शरीर के लिए बेहद हानिकारक हो सकते हैं।

स्विट्जरलैंड में अधिक प्रदूषण स्थल
तुलना के तौर पर स्विट्जरलैंड जैसे छोटे देश में, जहां औद्योगिक गतिविधियां भारत की तुलना में काफी कम हैं, वहां भारत की तुलना में अधिक प्रदूषित स्थल दर्ज हैं। यह स्थिति भारत में निगरानी और दस्तावेजीकरण की कमी की ओर संकेत करती है।
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नीतियों का बिखराव बना बड़ी चुनौती 
शोधकर्ताओं के अनुसार भारत में प्रदूषित भूमि से संबंधित नीतियां कई अलग-अलग विभागों में बंटी  हुई हैं। कहीं मिट्टी की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाता है, कहीं निपटान पर काम होता है। इस बिखरी हुई व्यवस्था के कारण समग्र भूजल की निगरानी होती है तो कहीं खतरनाक कचरे के तस्वीर स्पष्ट नहीं हो पाती।
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नियमित निगरानी व कानूनी जवाबदेही से सुधरेंगे हालात
अध्ययन में अमेरिका, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के उदाहरण दिए गए हैं, जहां प्रदूषित भूमि की पहचान और सफाई के लिए मजबूत तंत्र विकसित किए गए हैं। इन देशों में नियमित निगरानी, कानूनी जवाबदेही और वैज्ञानिक डेटा के चलती है। शोधकर्ताओं का आधार पर सुधार की प्रक्रिया मानना है कि भारत भी ऐसे मॉडल अपनाकर अपने प्रदूषित क्षेत्रों को अधिक सुरक्षित बना सकता है।

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