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अध्ययन का अनुमान: भारत आर्थिक शक्ति के साथ ही विज्ञान महाशक्ति बनने में भी सक्षम, रिसर्च पर करीब 60 फीसदी खर्च

Sat, 20 Apr 2024 05:51 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

भारत आर्थिक शक्ति के साथ ही विज्ञान महाशक्ति बनने में भी सक्षम है। एक अध्ययन के मुताबिक भारत में अनुसंधान एवं विकास पर करीब 60 फीसदी खर्च हो रहा है, जबकि अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी जैसे देशों में 20 प्रतिशत से भी कम खर्च हो रहा है।
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भारत का आर्थिक विकास (सांकेतिक) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में आम चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। एक जून तक चलने वाली इस मैराथन प्रक्रिया में करीब एक अरब मतदाता अपने मताधिकार का का प्रयोग करेंगे। विभिन्न जनमत सर्वेक्षणों का अनुमान है कि भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को विपक्षी इंडिया गठबंधन पर बढ़त हासिल है। चुनाव में विजेता दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का कार्यभार संभालेगा। अनुमान के मुताबिक, दशक के अंत तक भारत चीन और अमेरिका के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। आर्थिक शक्ति होने के साथ-साथ भारत विज्ञान महाशक्ति बनने की दिशा में भी अगला कदम उठाने के लिए तैयार है। 
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शोधकर्ताओं ने नेचर पत्रिका को बताया कि पिछली सरकारों की ओर से बुनियादी अनुसंधान की उपेक्षा की गई। एक संपन्न अनुसंधान प्रणाली को अधिक स्वायत्तता की आवश्यकता है। फंडिंग अंतर को पाटने के लिए भारत सरकार यह काम कर सकती है कि वह व्यवसायों, निजी क्षेत्र को अधिक योगदान देने के लिए प्रोत्साहित कर विज्ञान पर खर्च को बढ़ावा दे जैसा अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मामले में हैं। अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी में सरकार और यूनिवर्सिटी का अनुसंधान पर खर्च 20 फीसदी से भी कम है जबकि भारत में यह करीब 60 फीसदी है। भारत को छोड़कर अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी में बिजनेस-एंटरप्राइजेज सेक्टर का हिस्सा बहुत ज्यादा है। यदि नीति निर्माताओं और उद्योगपतियों को यह अधिकार मिल सके तो देश की प्रभावशाली वैज्ञानिक उपलब्धियों के तहत इसके उड़ान भरने के भरपूर अवसर मौजूद है।

अनुसंधान आउटपुट में सबसे समृद्ध देशों में से एक
अमेरिका और चीन के बाद अनुसंधान आउटपुट के मामले में भारत दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में से एक है। 2014 से 2021 तक यूनिवर्सिटी की संख्या 760 से बढ़कर 1,113 हो गई। पिछले दशक में 7 और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) स्थापित किए गए। इससे इनकी संख्या बढ़कर 23 हो गई है। 
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पिछले साल, भारत चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन गया और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला देश बना। भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट भी है।

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दवा उद्योग
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2021-22 में भारत मात्रा के हिसाब से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दवा उद्योग था। साथ ही सस्ती दवाओं और जेनेरिक दवाओं का अग्रणी आपूर्तिकर्ता था, जिनमें से कुछ दुनिया भर में कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए महत्वपूर्ण थीं।

अनुसंधान और विकास पर जीडीपी का मात्र 0.64%
अब विचार करें कि ये लाभ उस देश ने हासिल किए हैं जिसने 2020-21 के दौरान अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) पर अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का केवल 0.64 फीसदी खर्च किया। यह आंकड़ा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) का है।

विज्ञान को देनी होगी प्राथमिकता
कुल मिलाकर, विज्ञान में सार्वजनिक व निजी निवेश समाज, स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देता है। वे जानते हैं कि ये शोध निवेश क्या हासिल कर सकते हैं। 1 जून को भारत की मैराथन चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद जो भी गठबंधन विजयी होगा, उसे पता होना चाहिए कि भारत भी ऐसा कर सकता है और उसे ऐसा करना भी चाहिए।
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