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प्रसारण नियम 2026 मसौदा जारी: TV पर 30 मिनट, रेडियो पर एक घंटे का सामाजिक कार्यक्रम; 27 जुलाई तक सुझाव मांगे

Sat, 13 Jun 2026 04:15 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

सरकार ने प्रसारण नियम 2026 का मसौदा जारी किया है जिसमें टीवी पर 30 मिनट और रेडियो पर 1 घंटे सामाजिक महत्व के कार्यक्रम प्रसारित करना अनिवार्य किया गया है। सुझाव 27 जुलाई तक मांगे गए हैं।

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ब्रॉडकास्टिंग नियम 2026 का मसौदा जारी। - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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सरकार ने टीवी और रेडियो नियमों को सरल बनाने और व्यापार में आसानी सुनिश्चित करने के लिए तैयार दूरसंचार (टेलीविजन, रेडियो और संबद्ध सेवाएं) नियम, 2026 का मसौदा जारी किया है। प्रस्तावित मसौदे में यह प्रावधान भी शामिल किया गया है कि टीवी पर हर दिन 30 मिनट और रेडियो एफएम पर एक घंटे तक राष्ट्रीय महत्व के सामाजिक प्रासंगिकता वाले विषयों पर कार्यक्रम का प्रसारण करना अनिवार्य होगा।

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मसौदे के मुताबिक, टीवी हो या रेडियो हो या फिर कोई अन्य प्रसारक उसे शिक्षा, कृषि, ग्रामीण विकास, स्वास्थ, परिवार कल्याण, विज्ञान प्रौद्योगिकी, महिला कल्याण, कमजोर वर्गों का कल्याण, पर्यावरण और संस्कृति विरासत संरक्षण और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयों पर कार्यक्रम नियमित रूप से दिखाने होंगे। सुबह 6 बजे से रात 11 बजे के मध्य टीवी, ओटीटी को कम से कम 30 मिनट तक और रेडियो, एफएम को एक घंटे तक ऐसे कार्यक्रम प्रसारित करने होंगे। यह मसौदा मुख्यत: टेलीविजन और रेडियो सेवाओं के लिए एक एकीकृत नियामक ढांचा बनाने के लिए लाया गया है। हितधारक इस पर अपनी आपत्तियां और सुझाव जुलाई 27 तक दे सकेंगे।

90 दिन तक प्रसारण न करने पर प्राधिकार रद्द
इसमें प्रसारकों पर सख्ती बरतने की भी तैयारी की गई है। टेलीविजन चैनलों को अपने प्राधिकरण की वैधता अवधि के दौरान निरंतर परिचालन में रहना होगा। 60 दिन तक यदि चैनल पर प्रसारण बाधित रहता है तो सरकार को इस बाबत कारण सहित सूचित करना होगा। इसके अलावा अगर कोई चैनल 90 दिन तक प्रसारण नहीं करता तो उसका प्राधिकार रद्द माना जाएगा। जब तक की यह व्यवधान किसी सरकारी आदेश के तहत न हो।
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लाइसेंस और मंजूरी की समयसीमा तय
नए नियमों में अलग-अलग सेवाओं के लिए मंजूरी की समय-सीमा तय की गई है। टीवी चैनल, डीटीएच ऑपरेटर और कम्युनिटी रेडियो को मिलने वाली मंजूरी 10 साल के लिए वैध होगी। निजी रेडियो सेवाओं के लिए यह अवधि 15 साल और डीटीएच जैसी टेलीविजन चैनल वितरण सेवाओं के लिए 20 साल होगी। पुराने लाइसेंसधारियों को नई व्यवस्था में स्थानांतरित होने की सुविधा दी जाएगी।

व्यापार में होगी आसानी
नियामक स्पष्टता बढ़ने, अनुपालन संबंधी बोझ कम घटने से प्रसारण क्षेत्र संचालकों के लिए समग्र रूप से व्यापार करना आसान होगी। सैटेलाइट टेलीविजन चैनलों की अपलिंकिंग और डाउन लिंकिंग से संबंधित दिशानिर्देश डायरेक्ट-टू- होम-डीटीएच प्रसारण सेवाओं के लाइसेंसिंग और हेड एंड-इन-द-स्काई-एचआईएसटी प्रसारण सेवाओं को नियंत्रित करने वाले नियमों को इसी में समाहित किया जाएगा। निजी एफएम रेडियो प्रसारण के विस्तार और देशभर में सामुदायिक रेडियो स्टेशनों की स्थापना से संबंधित नीतियों को साथ लाने वाला यह समेकित ढांचा भविष्य में इस क्षेत्र के विकास की राह को आसान बनाएगा।

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