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करतारपुर कॉरिडोर पर पाकिस्तान की ‘छोटी’ सोच से भारत निराश

Sun, 17 Mar 2019 12:32 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गुरुद्वारा करतरपुर साहिब, पाकिस्तान (फाइल फोटो)
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सिखों की आस्था से जुड़े करतारपुर साहिब गुरुद्वारे तक आवागमन आसान करने वाले कॉरिडोर पर वार्ता में पाकिस्तान ने भारत से वार्ता के दौरान बेहद ‘छोटी’ और ‘सीमित’ दिखाई है। यह पड़ोसी देश के उस रुख के विपरीत है, जिसमें इस्लामाबाद खुद को इस कॉरिडोर के लिए बेहद उदार दिखाने का प्रयास करता है। अधिकृत सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान अपने करतारपुर शहर में बने गुरुद्वारा दरबार साहिब तक जाने वाले इस कॉरिडोर से गुजरने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा परमिट के जरिए अनुमति दिए जाने और उनसे कुछ शुल्क वसूलना चाहता है। 

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सूत्रों ने बताया कि बृहस्पतिवार को वाघा-अटारी बॉर्डर पर हुई दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक में पाकिस्तान की तरफ से यह मांग रखी गई। सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों में सबसे ज्यादा मतभेद गुरु नानक देव के अंतिम दिनों से जुड़े इस गुरुद्वारे तक जाने वाले भारतीय श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर था। पाकिस्तान महज 500 यात्रियों को हर दिन इजाजत देने के पक्ष में है, जबकि भारत रोजाना 5 हजार यात्रियों को भेजना चाहता है। साथ ही भारत खास मौकों पर 10 हजार अतिरिक्त श्रद्धालुओं को भेजने की भी इजाजत चाहता है।

रेफरेंडम-2020 को लेकर भी दी चेतावनी

अधिकृत सूत्रों के मुताबिक, भारत ने पाकिस्तान को वार्ता के दौरान रेफरेंडम-2020 से जुड़े आयोजन को लेकर भी चेतावनी दी। अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के कुछ सिख समूहों की तरफ से अलग खालिस्तान देश की मांग के लिए रेफरेंडम-2020 का समर्थन करने के लिए यह आयोजन किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, भारत ने इन देशों को भी आगाह कर दिया है कि यह देश का आंतरिक मामला है और इस रेफरेंडम की मांग करने वाले गिनती के सिख अब भारतीय नागरिक नहीं हैं और न ही भारतीय सिखों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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पाक का दावा, 31 अगस्त तक पूरा कर लेगा अपने हिस्से का कॉरिडोर

श्री करतारपुर कॉरिडोर का निर्माण कर रही पाकिस्तान के पंजाब राज्य सरकार के अधिकारियों ने एक नया वीडियो जारी कर दावा किया है कि उनकी तरफ का निर्माण कार्य 31 अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा। इस कॉरिडोर का निर्माण कार्य कर रही कंपनी के इंजीनियर आसिफ अली ने वीडियो में बताया कि निर्माण कार्य तीन शिफ्टों में चल रहे हैं। रावी दरिया पर बनाए जाने वाले पुल के सभी फाउंडेशन का निर्माण पूरा हो चुका है। रावी नदी में आने वाली किसी भी संभावित बाढ़ से बचने के लिए एक छोटा बांध भी बनाया जा रहा है। दोनों देशों के विशेषज्ञ 19 मार्च को डेरा बाबा नानक में मिलकर एक-दूसरे से जानकारी साझा करेंगे।

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