भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने उन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि भारत अमेरिका से बड़ी मात्रा में ईंधन के लिए इथेनॉल आयात करने की तैयारी कर रहा है। मंत्रालय ने साफ-साफ कहा कि ऐसी खबरें भ्रामक हैं और भारत की नीति में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
हाल के दिनों में कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बाद अमेरिकी इथेनॉल के लिए भारतीय बाजार खुल सकता है। इन अटकलों के बीच वाणिज्य मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत ने अमेरिका को ऐसा कोई आश्वासन नहीं दिया है और न ही ईंधन इथेनॉल के आयात की कोई योजना बनाई गई है।
क्या कहती है भारत की नीति?
सरकार के अनुसार, पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की खरीद पूरी तरह घरेलू उत्पादकों से की जाती है। इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम के तहत तेल विपणन कंपनियां केवल भारतीय निर्माताओं से ही फ्यूल इथेनॉल खरीदती हैं। इसलिए अमेरिका या किसी अन्य देश से पेट्रोल में मिलाने के लिए इथेनॉल आयात करने का सवाल ही नहीं उठता।
क्या व्यापार वार्ता को लेकर फैली गलतफहमी?
भारत और अमेरिका के बीच हाल में कई दौर की व्यापारिक बातचीत हुई थी। इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि भारत अमेरिकी इथेनॉल के आयात पर रोक में ढील दे सकता है। मंत्रालय ने साफ कहा कि व्यापार वार्ता में ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ और न ही इथेनॉल आयात को लेकर किसी तरह की सहमति बनी है।
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फ्यूल इथेनॉल और इंडस्ट्रियल इथेनॉल में अंतर
सरकार ने यह भी कहा कि फ्यूल इथेनॉल और इंडस्ट्रियल इथेनॉल अलग-अलग श्रेणियां हैं। फ्यूल इथेनॉल का इस्तेमाल पेट्रोल में मिश्रण के लिए किया जाता है, जबकि इंडस्ट्रियल इथेनॉल का उपयोग दवाइयों, सैनिटाइजर, रसायनों और अन्य औद्योगिक कार्यों में होता है। भारत जरूरत के मुताबिक सीमित मात्रा में औद्योगिक इथेनॉल का आयात करता है, लेकिन पेट्रोल में मिलाने वाला इथेनॉल पूरी तरह देश में ही तैयार किया जाता है।
किसानों को मिलता है सीधा लाभ
घरेलू इथेनॉल उत्पादन से गन्ना और मक्का किसानों को सीधा आर्थिक फायदा मिलता है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ती है, चीनी मिलों को अतिरिक्त बाजार मिलता है और देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होती है।
ई20 लक्ष्य पर सरकार का फोकस
केंद्र सरकार देशभर में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E20 लक्ष्य को तेजी से आगे बढ़ा रही है। इसके लिए नए इथेनॉल संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा रही है। सरकार का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और स्वदेशी जैव ईंधन को बढ़ावा देना है।