राजनाथ सिंह ने कहा कि रणनीतिक स्वायत्तता और देश में विकसित तकनीक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि रक्षा उत्पादन और निर्यात में पिछले वर्षों के दौरान बड़ी बढ़ोतरी हुई है। सरकार का लक्ष्य इस गति को और तेज करना है। रक्षा मंत्री के मुताबिक, देश का रक्षा उत्पादन 2014-15 में 46,429 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह रक्षा निर्यात 2014 में दो हजार करोड़ रुपये से भी कम था, जो अब करीब 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अब सरकार 2029 तक रक्षा उत्पादन को तीन लाख करोड़ रुपये और निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक ले जाना चाहती है।
रक्षा बजट में कितनी बढ़ोतरी हुई और सेना के आधुनिकीकरण पर कितना खर्च होगा?
रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट बढ़ाकर रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसमें 2.19 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए रखे गए हैं। पूंजीगत खर्च का इस्तेमाल नए हथियार, सैन्य उपकरण, विमान, जहाज और दूसरी आधुनिक सैन्य प्रणालियां खरीदने तथा विकसित करने में किया जाता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि सेना के आधुनिकीकरण के लिए पर्याप्त बजट के साथ उसका सही इस्तेमाल भी जरूरी है। तीनों सेनाओं की जरूरतों को प्राथमिकता देकर जरूरी उपकरणों की खरीद और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। उनका कहना है कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच सेना को आधुनिक बनाने का काम लगातार जारी रहना चाहिए।
आधुनिक युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए सेना में क्या बदलाव होंगे?
बैठक में भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों, युद्ध के बदलते तरीकों और नई तकनीक पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें अगली पीढ़ी के हथियारों और सैन्य प्लेटफॉर्म को जल्द सेना में शामिल करने पर जोर दिया गया। साथ ही थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल, संयुक्त योजना और मिलकर अभियान चलाने की क्षमता बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में तीनों सेनाओं को बदलती परिस्थितियों के हिसाब से अपनी तैयारी और काम करने के तरीके में लगातार सुधार करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सेना की ताकत केवल आधुनिक हथियारों और बजट से तय नहीं होती, बल्कि जवानों की क्षमता, प्रशिक्षण और तैयारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
थल सेना की नई टुकड़ियों और सैन्य तैयारियों को लेकर क्या बोले राजनाथ सिंह?
रक्षा मंत्री ने थल सेना की नई सैन्य टुकड़ियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 'असनी', 'भैरव' और 'शक्तिबाण' प्लाटून मौजूदा सैन्य जरूरतों को पूरा करने और युद्ध के मैदान में बदलती परिस्थितियों के अनुसार काम करने में प्रभावी साबित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि तीनों सेनाएं अपनी संरचना और तैनाती के तरीकों में लगातार बदलाव कर रही हैं। इसका मकसद किसी भी तरह की सुरक्षा चुनौती का तेजी से जवाब देना है। बैठक में पारंपरिक युद्ध के साथ सीमित स्तर के संघर्ष और कई क्षेत्रों में एक साथ पैदा होने वाली सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारी पर भी जोर दिया गया। सरकार का उद्देश्य ऐसी सेना तैयार करना है, जो हर परिस्थिति में प्रभावी ढंग से कार्रवाई कर सके।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए सरकार की आगे की योजना क्या है?
राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना लंबे समय की प्रक्रिया है। इसके लिए लगातार निवेश, आधुनिक तकनीक का विकास और प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना जरूरी है। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि केवल लक्ष्य तय करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें योजनाबद्ध तरीके से जमीन पर उतारना भी जरूरी है। इसके लिए आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। सरकार चाहती है कि भारत अपनी सैन्य जरूरतों के लिए घरेलू उद्योग पर अधिक भरोसा कर सके और दूसरे देशों पर निर्भरता घटे। तीन लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन और 50 हजार करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य इसी दिशा में बड़ा कदम है। इससे देश की रक्षा क्षमता मजबूत करने के साथ भारतीय रक्षा उद्योग को भी विस्तार मिलने की उम्मीद है।