हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड रेस से बाहर (विमान सांकेतिक)
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देश में पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने के एडवांस मिडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) प्रोजेक्ट से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) बाहर हो गई है। यह पहला मौका होगा जब किसी स्वदेशी लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट में एचएएल शामिल नहीं होगी।
रक्षा सचिव आरके सिंह ने क्या बताया?
एचएएल तेजस-एमके2 लड़ाकू विमान विकसित कर रही है, जिसे देसी राफेल कहा जाता है। एक चैनल के कार्यक्रम में रक्षा सचिव आरके सिंह ने बताया कि कुछ जरूरी तकनीकी शर्तें पूरी नहीं कर पाने के कारण एचएएल को बाहर किया गया है।
प्रोटोटाइप बनाने की दौड़ में कितने दावेदार?
एचएएल के बाहर होने के बाद अब एएमसीए के प्रोटोटाइप बनाने की दौड़ में तीन दावेदार बचे हैं। टाटा एडवांस्ड सिस्टम, एलएंडटी-बेल-डायनामैटिक कंसोर्टियम और भारत फोर्ज-बीईएमएल-डाटा पैटर्न्स का कंसोर्टियम। इस तरह पहली बार लड़ाकू विमानों के प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र की कंपनियों पर होगी।
सितंबर 2028 में उड़ान भर सकता है पहला प्रोटोटाइप
लगभग 15 हजार करोड़ का यह प्रोजेक्ट है। चुनी जाने वाली कंपनी को कुल पांच उड़ने वाले प्रोटोटाइप और एक ऐसा विमान तैयार करना होगा जिसका इस्तेमाल जमीन पर तकनीकी परीक्षण के लिए किया जा सके। रक्षा सचिव के मुताबिक, एएमसीए का पहला प्रोटोटाइप सितंबर 2028 में उड़ान भर सकता है। इसके बाद शेष प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे और उनकी टेस्टिंग होगी।