एक शीर्ष सरकारी सूत्र ने बताया कि "अमेरिका के साथ सौदा आगे नहीं बढ़ रहा है और लगभग सभी आयात मामलों को रोक दिया गया है। अब हम एक इस्रायली रक्षा निर्माता के साथ एक भारतीय निजी फर्म द्वारा सशस्त्र यूएवी विकसित करने पर विचार कर रहे हैं।"
केंद्र सरकार अब एक इस्रायली रक्षा निर्माता के साथ साझेदारी में स्वदेशी लंबी दूरी के मानव रहित हवाई वाहनों के अधिग्रहण पर विचार कर रही है। इजरायली कंपनी एक निजी भारतीय फर्म के साथ मिलकर स्ट्राइक क्षमताओं को विकसित करने पर काम करेंगी। बता दें कि इससे पहले भारत ने मेक इन इंडिया अभियान को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका के प्रिडेटर सशस्त्र ड्रोन सौदे पर रोक लगा दी थी।
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बता दें कि एक लेफ्टिनेंट जनरल की अध्यक्षता वाली एक समिति ने अमेरिकी सशस्त्र ड्रोन सौदे पर समीक्षा करने करने के लिए कहा था क्योंकि इन 30 सशस्त्र ड्रोंनों की कीमत करीब 4.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो रही थी जो कि बहुत महंगा हो रहा था। इसके बाद इस सौदे पर रोक लगा दी गई थी।
एक शीर्ष सरकारी सूत्र ने बताया कि "अमेरिका के साथ सौदा आगे नहीं बढ़ रहा है और लगभग सभी आयात मामलों को रोक दिया गया है। अब हम एक इस्रायली रक्षा निर्माता के साथ एक भारतीय निजी फर्म द्वारा सशस्त्र यूएवी विकसित करने पर विचार कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि परियोजना में भारतीय फर्म का योगदान सरकार द्वारा निर्धारित मेक इन इंडिया मानदंडों के मुताबिक है।
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शुरुआती योजनाओं के अनुसार, भारत लंबे समय तक चलने वाले मिसाइलों सहित स्ट्राइक क्षमता से लैस 30 अमेरिकी सशस्त्र ड्रोन हासिल करने की योजना बना रहा था, जिन्हें तीनों सेवाओं के बीच समान रूप से वितरित किया जाना था।