भारत और चीन के बीच कमांडर स्तर की 9वें राउंड की वार्ता रविवार यानी 24 जनवरी को होगी। यह बैठक भारत में चुशुल सेक्टर के दूसरी ओर स्थित मोल्डो में की जाएगी। बैठक का लक्ष्य पूर्वी लद्दाख में नौ महीनों से जारी तनाव का समाधान निकालना है। बैठक में विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि के भी शामिल होने की संभावना है।एक अधिकारी ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, 9वें दौर की वार्ता काफी महत्वपूर्ण है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस वार्ता में दोनों पक्षों के बीच एक लिखित समझौता हो सकता है। पिछली कुछ बैठकों की तरह विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि भी इस बैठक का हिस्सा होंगे। दोनों पक्षों के बीच आखिरी सैन्य बैठक छह नवंबर को हुई थी।
इससे पहले, 18 दिसंबर, 2020 को विदेश मंत्रालय स्तर की वार्ता में दोनों देशों ने कहा था कि वे वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ सभी तनाव वाले स्थानों से सैनिकों की वापसी सुनिश्चित करने की दिशा में काम जारी रखने को तैयार हैं। उसी वक्त नौवें दौर की वार्ता को लेकर सहमति बनी थी।
6 नवंबर 2020 को वरिष्ठ कमांडरों की आयोजित 8वें दौर की बैठक को लेकर दोनों पक्षों ने कहा था कि इस बैठक में जमीन पर स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद मिली। आठवें दौर की इस बातचीत के दौरान चीन की पीएलए ने कहा था कि वे अपने फ्रंटलाइन सैनिकों को संयम बरतने और किसी भी गलतफहमी से बचने के लिए सुनिश्चित करेंगे। 30 अगस्त, 2020 को भारत ने पैगोंग झील के दक्षिणी तट के पहाड़ी इलाके जैसे रेचिन ला, रेजांग ला, मुकपारी आदि पर कब्जा हासिल कर लिया था।
एलएएसी पर सौहार्दपूर्ण समाधान की उम्मीद
इस माह के शुरुआत में आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा था कि सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास जारी विवाद के लिए सौहार्दपूर्ण समाधान की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि हम अपनी जमीन के लिए तैयार हैं चाहे देश के हित और लक्ष्य साधने में कितना भी समय लगे।
चीन औ भारत ने तनाव के चलते सीमाओं पर भारी संख्या में सैन्य बल, तोपों और हथियारों को तैनात किया है। सीमा पर कुछ इलाकों में तापमान शून्य से 30 डिग्री सेल्सियस नीचे जा चुका है, इसके बावजूद सैन्य बल की संख्या में कमी नहीं आई है। सर्दियों के दौरान सीमा पर शांति बनी रही, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ है।