भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों की बीच हुई कूटनीतिक वार्ता की जानकारी विदेश मंत्रालय ने साझा की है। विदेश मंत्रालय ने बताया है कि इस दौरान दोनों पक्षों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति और सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया की समीक्षा की।
मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि एलएसी पर सैनिकों की जल्द और पूरी तरह से वापसी दोनों देशों के बीच संबंधों की बेहतरी के लिए बेहद अहम है। दोनों पक्षों ने इस पर भी सहमति जताई कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता व्यापक संबंधों के लिए आवश्यक है।
इसके साथ ही मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य स्तर पर चल रही वार्ताओं के दौर को आगे भी जारी रखने पर सहमत हुए। दो पक्षों के बीच गतिरोध वाले स्थानों से पूरी तरह विघटन सुनिश्चित करने के कदम उठाने के लिए वरिष्ठ कमांडरों की एक और बैठक जल्द आयोजित की जा सकती है
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार को एक ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग में कहा था कि विमर्श व समन्वय कार्य तंत्र के ढांचे के तहत भारत और चीन के बीच कूटनीतिक स्तर की एक और दौर की वार्ता जल्द होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा था- 14 जुलाई को लगभग 15 घंटे तक चली कोर कमांडर स्तर की बैठक के बाद सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया उम्मीद के अनुरूप आगे नहीं बढ़ी है। श्रीवास्तव ने कहा कि जैसा कि हम पहले कह चुके हैं, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता कायम रखना हमारे द्विपक्षीय संबंधों का आधार है।
उन्होंने कहा कि इसलिए यह हमारी उम्मीद है कि विशेष प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति के अनुरूप चीनी पक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों से पूरी तरह हटने और तनाव कम करने तथा पूर्ण शांति एवं स्थिरता बहाली के लिए हमारे साथ ईमानदारी से काम करेगा।
पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव कम करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच पांच जुलाई को टेलीफोन पर लगभग दो घंटे तक बात हुई थी। इस वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने छह जुलाई से विवाद वाले स्थानों से अपने-अपने सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।