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लद्दाख में तमाम मुश्किलों के बावजूद मास्क-सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन कर रही सेना

Sun, 05 Jul 2020 03:23 AM IST
योगेश साहू गुंजन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

  • अग्रिम इलाके में तैनात जवान कई स्तर पर कर रहे संक्रमण से बचाव
  • लद्दाख  में ऑक्सीजन की कमी में मास्क पहनना चुनौती से कम नहीं
  • चीन के साथ कोर कमांडर की वार्ता में मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग अनिवार्य
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सेना के जवान - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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पूर्वी लद्दाख में तैनात चार डिविजन के जवान तमाम व्यावहारिक मुश्किलों के बावजूद मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग नियम का सख्ती से पालन कर रहे हैं। पूरा सैन्य महकमा कोरोना संक्रमण के प्रति अति सतर्कता बरत रहा है। लद्दाख में करीब 11000 से 14000 फीट की ऊंचाई पर ऑक्सीजन की खासी कमी के कारण मास्क का पहनना जवानों और अधिकारियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

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इसके बावजूद किसी तरह की कोताही नहीं बरती जा रही है। यही वजह है कि लेह समेत पूरे लद्दाख में सैन्य तैनाती के मद्देनजर अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। लेह से बाहर जाने की खुली छूट नहीं है। भारत चीन तनाव को कवर करने गए पत्रकारों और मीडियाकर्मियों को भी आसानी से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है।

बाहर से आए दूर दराज के इलाके में रहने वाले लोगों पर स्थानीय प्रशासन खास नजर रख रहा है। एहतियात बरती जा रही है कि सेना तक पहुंचने वाली सामग्रियों की सप्लाई चेन में काम करने वाले असैन्य लोगों का कोरोना टेस्ट हुआ हो। सैन्य सूत्रों के मुताबिक, इस तरह से तनावग्रस्त और युद्ध जैसे हालात में जवानों में अगर संक्रमण फैला तो कई तरह की मुश्किलें आएंगी।
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सैन्य जवानों और अधिकारियों की चुस्ती और फिटनेस स्तर के उच्चस्तरीय होने के बावजूद प्रतिदिन उनकी सेहत का जायजा लिया जा रहा है। चीन के साथ कोर कमांडर स्तर की तीन बार हुई बातचीत के दौरान भी मास्क पहनना और दूरी बनाए रखना अनिवार्य शर्तों में था। सूत्रों के मुताबिक चीन हमेशा चाहेगा कि भारतीय खेमा कोरोना संक्रमण की चपेट में आ जाए।

ट्रेनिंग सेंटर को वार्ड में बदला
सेना के मुताबिक, लेह स्थित मिलिट्री अस्पताल के ऑडियो-वीडियो ट्रेनिंग सेंटर को 100 बिस्तर वाले अतिरिक्त वार्ड में बदला गया है। क्योंकि अस्पताल के मौजूदा वार्ड को कोविड-19 इलाज के लिए तैयार रखा गया है। 15 जून को गलवां घाटी में घायल जवानों को इसी वार्ड में रखा गया है ताकि वह कोरोना संक्रमण की किसी भी संभावना से दूर रहें। बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी शुक्रवार को इसी अस्पताल में जवानों से मिले थे।

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