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अहमदाबाद से शियान तक: मोदी-जिनपिंग के दौर में ऐसे रहे भारत और चीन के संबंध

प्रियेश मिश्र, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Wed, 09 Oct 2019 04:00 PM IST
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मोदी-जिनपिंग (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter

चीनी राष्ट्रपति के आगामी भारत दौरे को लेकर राजनैतिक सरगर्मियां जोरों पर हैं। दौरे को देखते हुए जहां भारत ने अरुणाचल सीमा पर होने वाले सैन्य अभ्यास हिम विजय को फिलहाल रोक दिया है वहीं इमरान के लाख गिड़गिड़ाने के बावजूद चीन ने कश्मीर को भारत-पाक का द्विपक्षीय मामला बताया है। माना जा रहा है कि दोनों देश आपसी तनाव को कम करने के लिए ऐसा कदम उठा रहे हैं।

1962 का युद्ध और दोकलम में हुए विवाद के बाद दोनों देश एक दूसरे का भरोसा जीतने की कोशिशों में लगे हुए हैं। सीमा पर बढ़ती झड़पों की संख्या भी दोनों देशों के नेताओं के बीच विश्वास बहाली में व्यवधान बन रहा है।



भारत एनएसजी की पूर्ण सदस्यता पाना चाहता है लेकिन बार-बार चीन द्वारा अड़गा लगाने से यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने मामले में भी यह देखने को मिला कि पाकिस्तान की सहायता करने के लिए चीन ने बार-बार यूएनएससी में वीटो का प्रयोग किया।

अमेरिका, फ्रांस, जापान, रूस और अन्य एशियाई-अफ्रीकी-यूरोपीय देश भारत को एनएसजी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता का समर्थन कर रहे हैं। लेकिन, चीन की हठधर्मिता के कारण भारत को आशातीत सफलता नहीं मिल पा रही है। फिर भी प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम इस लक्ष्य को पाने के लिए प्रयासरत हैं।

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मोदी-जिनपिंग (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter
चीनी राष्ट्रपति के आगामी भारत दौरे को लेकर राजनैतिक सरगर्मियां जोरों पर हैं। दौरे को देखते हुए जहां भारत ने अरुणाचल सीमा पर होने वाले सैन्य अभ्यास हिम विजय को फिलहाल रोक दिया है वहीं इमरान के लाख गिड़गिड़ाने के बावजूद चीन ने कश्मीर को भारत-पाक का द्विपक्षीय मामला बताया है। माना जा रहा है कि दोनों देश आपसी तनाव को कम करने के लिए ऐसा कदम उठा रहे हैं।

1962 का युद्ध और दोकलम में हुए विवाद के बाद दोनों देश एक दूसरे का भरोसा जीतने की कोशिशों में लगे हुए हैं। सीमा पर बढ़ती झड़पों की संख्या भी दोनों देशों के नेताओं के बीच विश्वास बहाली में व्यवधान बन रहा है।

भारत एनएसजी की पूर्ण सदस्यता पाना चाहता है लेकिन बार-बार चीन द्वारा अड़गा लगाने से यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने मामले में भी यह देखने को मिला कि पाकिस्तान की सहायता करने के लिए चीन ने बार-बार यूएनएससी में वीटो का प्रयोग किया।

अमेरिका, फ्रांस, जापान, रूस और अन्य एशियाई-अफ्रीकी-यूरोपीय देश भारत को एनएसजी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता का समर्थन कर रहे हैं। लेकिन, चीन की हठधर्मिता के कारण भारत को आशातीत सफलता नहीं मिल पा रही है। फिर भी प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम इस लक्ष्य को पाने के लिए प्रयासरत हैं।

इस तरह शुरू हुई थी मोदी-जिनपिंग की 'होम टाऊन डिप्लोमेसी'

पीएम मोदी और शी जिनपिंग - फोटो : PTI
प्रधानमंत्री मोदी के 2014 में देश की बागडोर संभालने के तुरंत बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को नया आयाम देने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 17 से 19 सितंबर 2014 के दौरान भारत की राजकीय यात्रा की थी। इस दौरान पीएम मोदी ने अपने गृह राज्य गुजरात के अहमदाबाद में जिनपिंग की जिस तरह से अगवानी की उससे लगा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को नया आयाम मिलेगा। 

इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच वाणिज्य एवं व्यापार, रेलवे, अंतरिक्ष सहयोग, औद्योगिक पार्कों की स्थापना सिस्टर सिटी सहित कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इसी दौरान दोनों देशों ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नाथूला से होते हुए एक अतिरिक्त मार्ग खोलने के लिए ओएमयू पर हस्ताक्षर किया था। 

हालांकि इसी दौरान चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के करीब 1000 जवान जम्मू कश्मीर के चुमार इलाके में घुस आए थे। भारत ने भी अपनी सेना को उनके सामने तैनात कर दिया था लेकिन इस विवाद की आंच जम्मू कश्मीर से गुजरात तक नहीं पहुंचने दी गई। भारत ने चीनी राष्ट्रपति के सामने भी इस मामले को रखा था। लेकिन, इस बात का पूरा ध्यान रखा गया कि जिनपिंग की यात्रा पर कोई खलल न पड़े।

जिनपिंग के गृहराज्य में पीएम मोदी का स्वागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 से 16 मई तक चीन का दौरा किया। इस दौरान पहली बार चीन ने किसी विदेशी नेता का स्वागत बीजिंग से बाहर किया। जिनपिंग ने पीएम मोदी का स्वागत अपने गृहराज्य शियान के शाशी में किया। पीएम मोदी के इस दौरे ने बड़े स्तर पर सुर्खियां बटोरी।

100 बिलियन डॉलर तक व्यापार पहुंचाने पर जोर

दोनों नेता आपसी व्यापार को 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा करने की कोशिशों में लगे हुए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 80 बिलियन डॉलर के आस-पास है। हालांकि, भारत की चिंताओं में चीन द्वारा आरोपित गैर-टैरिफ बाधाएं, माल की डंपिंग और चीन द्वारा निवेश की कमी शामिल है। भारत चीनी कंपनियों को भारत में अधिक निवेश के लिये आकर्षित करने की कोशिशों में लगा है।

दोकलम विवाद- जब चरम पर पहुंचा दोनों देशों के बीच तनाव

पीएम मोदी और शी जिनपिंग - फोटो : ANI
साल 2017 में 18 जून को भारत-चीन-भूटान सीमा पर स्थित दोकलम में चीनी सेना ने घुसपैठ कर अपनी स्थायी चौकी बना ली। जिसके जवाब में भारत ने भी अपनी सैन्य टुकड़ी को उनके सामने खड़ा कर दिया। 

दोनों देशों के बीच यह तनाव लगभग 73 दिनों तक चलता रहा। इस मसले का समाधान राजनयिक स्तर की वार्ता के बाद निकाला गया। दोकलम पर चीन अपना दावा करता है जबकि यह भूटान के 'हा घाटी' में स्थित है। दोकलम भारत के पूर्वी सिक्किम जिला के पास स्थित है। चूकिं भूटान के सीमा की सुरक्षा भी भारतीय सेना ही करती है इसलिए त्वरित कार्रवाई कर चीनी अतिक्रमण को रोका जा सका।

ओआरओबी पर भारत को आपत्ति

भारत की संप्रभुता का उल्लंघन कर चीन ने वन बेल्ट वन रूट के अंतर्गत पाकिस्तान में ना केवल काराकोरम राजमार्ग का निर्माण कर के अपनी सेना के लिए अरब सागर तक पहुंचने का मार्ग बनाया है। बल्कि इसके साथ ही नेपाल सीमा को राज मार्ग से जोड़ने का एक अनूठा प्रयास भी किया है। भारत शुरू से ओआरओबी का विरोध करता रहा है जिसे लेकर नई दिल्ली ने कई बार अपनी चिंताएं बीजिंग के साथ साझा की है।

साल 2018 के अंत में भारत-चीन संबंधों पर संसद में प्रस्तुत विदेश मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया कि सरकार को भारत और चीन के बीच संबंधों का गहन मूल्यांकन करना चाहिए ताकि चीन से व्यवहार के तरीके पर राष्ट्रीय सर्वसम्मति बन सके।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया कि सीपीईसी भारत को स्वीकार्य नहीं है क्योंकि यह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) से गुजरता है, जो कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है। समिति ने चीन द्वारा प्रस्तावित वन बेल्ट वन रोड पहल को दृढ़ता से खारिज करने के भारत के रवैये की सराहना की है।

इसने सिफारिश की है कि भारत को ओबीओआर पहल के जवाब में विभिन्न पहलों के तहत स्वयं की कनेक्टिविटी परियोजनाओं को बढ़ावा देना चाहिए। समिति ने उल्लेख किया कि भारत और चीन के बीच रक्षा सहयोग में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन 2017 में दोकलम विवाद के बाद दोनों देशों के बीच इस प्रकार के सहयोग पर रोक लगा दी गई थी। 

पाकिस्तान पर भारत और चीन के बीच शह-मात का खेल जारी

पीएम मोदी, शी जिनपिंग (फाइल फोटो)
चीन हर कदम पर अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान की मदद करता आ रहा है। अनुच्छेद 370 पर शुरुआत में पाकिस्तान का समर्थन कर अलग-थलग पड़े चीन ने यू टर्न मारते हुए इसे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय मामला बताया है। इसके अलावा आतंकवाद के मुद्दे पर भी उसने परोक्ष रूप से पाकिस्तान को इसे बंद करने के लिए कहा है।

वहीं अंदरखाने से चीन, पाकिस्तान को हर मोर्चे पर सहायता पहुंचा रहा है। चीन की मदद से पाकिस्तान ने न्यूक्लियर बम बनाया। जिसकी धमकी वह हमेशा भारत को देता रहता है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इस समय भी चीन में ओआरओबी की बंद पड़ी परियोजनाओं को फिर से शुरू करने के लिए जिनपिंग से बात कर रहे हैं। 

सूत्रों के अनुसरा, आतंकी गतिविधि और टेरर फंडिग को रोकने में विफल पाए जाने के बाद एफएटीएफ अब पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट करने जा रहा है। चीन अपने सदाबहार दोस्त को बचाने के लिए इसमें अड़ंगा लगाने की कोशिश कर सकता है। वहीं पाकिस्तानी सेना को चीन द्वारा दिए जा रहे आधुनिक हथियार भी भारत के लिए चिंता का विषय हैं।

नहीं रुकी चीनी सैनिकों के घुसपैठ की कोशिशें 

  • 6 जुलाई 2019 को चीनी सैनिक जम्मू-कश्मीर के लद्दाख में गाड़ियों से डेमचोक सेक्टर में करीब डेढ़ किलोमीटर तक घुस आए थे। कोयुल गांव में घुसे चीनी सैनिकों ने दलाईलामा के 84वें जन्मदिन पर तिब्बती शरणार्थियों द्वारा झंडा फहराने का विरोध किया था।
  • 27 सितंबर 2018 को चीन के दो हेलीकॉप्टरों ने लद्दाख में भारतीय सीमा में घुसपैठ की थी और करीब 10 मिनट तक हवा में मंडराते रहे थे। लद्दाख ट्रिग हाइट्स को ट्रेड जंक्शन के नाम से भी जाना जाता है, जो लद्दाख और तिब्बत को एक-दूसरे से जोड़ता है। 
  • 6 अगस्त, 14 अगस्त और 15 अगस्त 2018 को चीनी सेना ने राहोती के रिमखिम पोस्ट के नज़दीक घुसपैठ की। इस दौरान चीनी सैनिकों की भारत तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों से धक्का-मुक्की भी हुई।
  • 10 मार्च 2018 को चमोली से लगे भारत-चीन सीमा क्षेत्र बाड़ाहोती में चीनी सेना के तीन हेलीकॉप्टर भारत की सीमा पर करीब चार किलोमीटर अंदर घुस आए। पांच मिनट तक आसमान में मंडराने के बाद हेलीकॉप्टर वापस चले गए हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।
  • चीन ने पैंगोंग झील के पास गाड़ियों के जरिये 28 फरवरी, 7 मार्च और 12 मार्च 2018 को घुसपैठ की। भारतीय सेना द्वारा जवाबी कार्यवाई करने के बाद चीनी सैनिक वापस लौट गए। 
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