पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग त्सो की तरह डेपसांग के वाई जंक्शन पर भी चीन सैन्य जमावड़ा कर उत्तरी लद्दाख से गुजरने वाली नियंत्रण रेखा (एलएसी) के अति संवेदनशील इलाके में भारत की गश्त पर अंकुश लगाने की फिराक में है। अगर चीन को रोका नहीं गया तो उसके वाई जंक्शन पर रहते हुए उसकी सेना पेट्रोलिंग प्वाइंट-10 (पीपी-10) से पेट्रोलिंग प्वाइंट-13 तक अवरोध पैदा करेगी। यह इलाका भारत के तरफ है। चीन ने ऐसा ही पैंगोंग त्सो के भारतीय कब्जे वाले फिंगर-4 से फिंगर-8 तक इलाके में किया है।
डेपसांग वाई जंक्शन से दौलत बेग ओल्डी (डीओबी) 30 किमोमीटर है। यहीं, भारतीय वायुसेना का बेस और सेना का महत्वपूर्ण ठिकाना है।अगर चीन पीपी10 और 13 के बीच जमता है तो डीओबी से सिर्फ सात किमी दूर तक पहुंचकर और मजबूत हो सकता है। गलवां घाटी में पीपी15 पर दोनों सेनाओं के बीच हिंसक भिड़ंत हुई थी।
- 2013 में भी चीन कर चुका दुस्साहस
2013 में चीनी सेना इसी वाई जंक्शन पर जमा हुई थी और भारतीय सेना से हफ्तों तनातनी रही थी। कूटनीतिक और राजनयिक स्तर पर बातचीत के बाद चीन पीछे हटा था। डेपसांग से गुजरने वाले एलएसी पर घुमावदार पहाड़ों के जाल में एक जगह ऐसी आती है जो वाई का रूप लेती है। इसके एक तरफ डेपसांग है और दूसरी तरफ डीओबी है। चीन ऐसी जगह बैठा है जहां दोनों रास्ते अवरुद्ध होते हैं।