भारत के लिए मुश्किल, लेकिन चीन के लिए आसान
सीमावर्ती क्षेत्र में सैनिकों की संख्या घटाना, बढ़ाना चीन के लिए बहुत आसान है। इसका कारण वास्तविक नियंत्रण रेखा के उस पार की भौगोलिक स्थिति, चीन की तरफ किया गया विकास, आधारभूत संरचना आदि है। चीन की तरफ से टैंक, सैन्य वाहन और अन्य फर्राटा भरते हुए आते हैं। जबकि भारत के लिए यह मुश्किल भरा और समय लेने वाला मामला है। इसका कारण सीमावर्ती क्षेत्र में भारतीय आधारभूत संसाधनों नें कमी, पहाड़ी रास्ते तथा लॉजिस्टिक सपोर्ट की कमियां हैं। भारत के लिए लद्दाख क्षेत्र और समूची वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा बलों की तैनाती काफी खर्चीली भी होती है। ठंड के समय में कपड़े, जूते, आवास, सुविधा को लेकर यह खर्च कई गुणा बढ़ जाता है।
25वें दौर की वार्ता में दिखाई पड़ी थी केमिस्ट्री
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 25-26 अगस्त 2026 को चीन दोरे पर थे। मकसद था चीन के अपने समकक्ष वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद निपटारे के लिए 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि स्तरीय वार्ता करना। दोनों शीर्ष इस बात पर सहमत हुए कि...
- दोनों देशों के बीच में सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना पहली और अनिवार्य शर्त होनी चाहिए।
- दोनों देश सीमा पर अगस्त 2024 से शुरू हुई सैनिकों की तैनाती में कटौती की प्रक्रिया को जारी रखें। तनाव कम करने की प्रक्रिया को मजबूत करने का प्रयास बढ़ाया जाए।
- इसके साथ-साथ सीमा पर बनी शांति और सौहार्द को दीर्घकालिक, स्थायी रूप देना। सीमा विवाद को सुलझाने के लिए दोनों देश राजनयिक और सैन्य तंत्र(डब्ल्यूएमसीसी) की बैठकें और गहन संवाद जारी रखेंगे।
अब आगे क्या होगा?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का रवैया सहयोगात्मक, सकारात्मक रहा। द्विपक्षीय वार्ता के दौरान आपसी हित से जरूरी सभी मुद्दों पर बात हुई। भारत और चीन इस बात पर सहमत हैं कि दोनों में टकराव अच्छा नहीं है। भारत सीमा विवाद को भरोसा से जोड़ता है और इसके निबटारे को सीमा पर शांति और सौहार्द का मुख्य आधार मानता है। एनएसए डोभाल की एक अजमाई कूटनीति है। वह किसी स्थिति को तीन हिस्से में बांटते हैं।
- जहां लगभग सहमति है, उसे निर्णायक रूप दिया जाए। जैसे सिक्किम से लगती सीमा पर भारत और चीन में आम सहमति है। इसे अंतिम रूप देने पर सहमत हो सकते हैं।
- जिस विवाद को सुलझाया जा सकता है, उसे सुलझाने की ईमानदारी से पहल की जाए। जैसे लद्दाख के डेपसांग, डेमचोक समेत कुछ क्षेत्र को छोड़कर अन्य। इसी तरह से तवांग के कुछ क्षेत्र छोड़कर वास्तविक नियंत्रण रेखा के कम विवाद वाले क्षेत्र।
- जटिल विवाद वाले मुद्दे पर डब्ल्यूएमसीसी समेत विवाद निबटारे की ठोस प्रक्रिया( राजनीतिक, राजनयिक और सैन्य प्रबंधन तंत्र के गहन संवाद और प्रयास) से हल। माना जा रहा है कि भारत और चीन इस दिशा में आगे बढ़ते हुए पीपुल-टू पीपुल कांटैक्ट, व्यापार और कारोबार को गति तथा द्विपक्षीय व्यापार, कारोबार को संतुलित बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।