भारत और चीन के बीच सरहद पर तनाव जारी है। पिछले एक सप्ताह में चीनी सैनिकों की तरफ से भारतीय सैनिकों पर कई हमले करने, हथियार छीनने और उनको हिरासत में लेने की खबर है। अब भारतीय सेना ने इन खबरों का खंडन किया है। सेना की ओर से कहा गया है कि चीन की ओर से भारतीय जवानों को हिरासत में नहीं लिया गया और न ही उनके हथियार छीने गए हैं।
दोनों पक्षों के स्थानीय सैन्य कमांडरों के बीच अब तक पांच बैठक हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक स्थिति अनसुलझी है। सूत्रों ने कहा कि चीनी सैनिकों ने एलएसी पर तीन स्थानों को पार किया है। इनमें से प्रत्येक स्थान पर लगभग 800-1000 चीनी सैनिक मौजूद हैं।
सूत्रों का कहना है कि चीनी सेना ने पिछले दो सप्ताह में 100 से ज्यादा तंबू गाड़कर अपनी स्थिति को मजबूत किया है। बंकर बनाने वाली मशीनों को भी लाना चालू कर दिया है। भारतीय सेना ने भी गलवां झील और घाटी क्षेत्र, दोनों जगह पर निर्माण चालू किया है। भारतीय सेना इस क्षेत्र में बेहतर स्थिति में है। पिछले एक सप्ताह में चीनी सैनिकों की तरफ से भारतीय सैनिकों पर कई हमले करने की भी खबर है लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
वहीं, शनिवार को सीमा विवाद को लेकर भारत-चीन में तनाव के बीच सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे लद्दाख दौरे पर पहुंचे। नरवणे के साथ सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी, 14वीं कोर के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी भी थे।
हालांकि, सेना प्रमुख ने पूरे हालात और रक्षा तैयारियों का जायजा लिया। इसी इलाके के गलवां नदी घाटी के पास पिछले दिनों भारत और चीन की सेना के बीच झड़प हुई थी। इससे पहले नरवणे ने जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की बढ़ती घटनाओं और सीमा पर पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी को देखते हुए पिछले महीने वहां का दौरा किया था।