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सीमा विवादः 61 साल बाद भी नहीं गई चीन की वो छटपटाहट, क्या आज भी उसी राह पर है पीएलए

Wed, 21 Oct 2020 07:55 PM IST
संजीव कुमार झा जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत और चीन की सेना(फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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चीन ने 61 साल पहले जो हरकत की थी, वह 2020 में भी उसे दोहराने का प्रयास कर रहा है। इतने दशकों बाद भी चीन की छटपटाहट नहीं गई। 'पीएलए' यानी पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने 1959 में भी लद्दाख क्षेत्र की सीमा चौकियों पर कब्जा जमाने का प्रयास किया था।  उस वक्त जब इस इलाके में नई पोस्ट खड़ी की जा रही थी, तब पीएलए ने ऊपर की चौकियों को निशाना बनाया था। सीआरपीएफ से रिटायर्ड और हॉट स्प्रिंग मिशन के एकमात्र जीवित लद्दाखी हीरो सोनम वांग्याल (79) का कहना है कि चीन आज भी वैसी हरकत कर रहा है।

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उसे माकूल जवाब देना होगा। पीएलए की रणनीति रही है कि जब उसके सैनिक घुसपैठ का प्रयास करते हैं तो एक साथ कई मोर्चों पर तनाव पैदा कर देते हैं। सोनम वांग्याल के अनुसार, हॉट स्प्रिंग में 1959 के दौरान चीनी फौज ने एक साथ कई इलाकों में घुसपैठ की थी। चीन, सदैव धोखा देता आया है, ये बात केवल किताबी नहीं है।

चीन विस्तारवादी नीति का समर्थक रहा है। वह 1959 में इस नीति पर चला और आज भी उसी को आगे बढ़ा रहा है। पीएलए की किसी बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उस वक्त पीएलए ने ऊपर की सामरिक पोस्ट पर कब्जा करने के लिए घुसपैठ की थी।
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उसके सैनिक चाहते थे कि लद्दाख क्षेत्र की ऊपरी चौकियों पर कब्जा कर लिया जाए। पीएलए के सैंकड़ों सैनिक, जिनके पास भारी हथियार थे, उन्होंने हमारे दल पर हमला किया था। हम अपने लापता साथियों को तलाश करने के लिए निकले थे। एक टीम की कमान आईटीबीएफ के डीएसपी करमसिंह को और दूसरी टुकड़ी की कमान एसपी त्यागी को सौंपी गई थी।

भारी बर्फबारी के चलते हमारे कुछ साथी रास्ता भटक गए थे। बाद में पता चला कि उन्हें पीएलए ने अपनी कैद में ले लिया था। कूटनीतिक प्रयासों के बाद उन जवानों को 13 नवंबर को चुशुल एयरपोर्ट के निकट रिहा किया गया।

उस दौरान पीएलए के सैनिक ऊपर की चोटी पर खड़े होकर चिल्लाते थे कि आप यहां से चले जाओ। यह इलाका हमारा है। उनका मकसद था कि किसी भी तरह ऊपर की चौकी कब्जा कर ली जाए। जब हम अपने साथियों की खोज में निकले तो उन्होंने बीच राह में ऊपर के हिस्से से हम पर गोलियां बरसानी शुरु कर दी। हमारे दस साथी शहीद हो गए। 

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