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भारत ने कहा: पूर्वी लद्दाख से सैनिकों की वापसी शांति बहाल करने का एकमात्र रास्ता

Fri, 05 Mar 2021 08:25 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • विदेश मंत्रालय ने कहा, पैंगोंग झील से सैन्य वापसी महत्वपूर्ण कदम, अन्य मुद्दों के समाधान का आधार मिलेगा 
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भारत चीन गतिरोध - फोटो : iStock
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विस्तार
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भारत ने कहा है कि पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की वापसी भारत और चीन के बीच शांति बहाल करने का एकमात्र रास्ता है। हमें उम्मीद है कि चीन राजनयिक व सैन्य स्तर पर हमारे साथ सहयोग करेगा ताकि शेष क्षेत्र में सेना वापसी की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो सके। साथ ही भारत ने कहा है कि पैंगोंग झील क्षेत्र में सैनिकों की वापसी एक अहम कदम था और इससे वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से लगने वाले क्षेत्रों में अन्य मुद्दों के समाधान के लिए एक अच्छा आधार मिलेगा। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने शुक्रवार को कहा, पिछले सप्ताह विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से विस्तृत बातचीत की और आपस में हॉटलाइन स्थापित करने पर सहमति जताई। राजनयिक चैनल के जरिये इस पर काम किया जा रहा है। हमें अपेक्षा है कि चीन वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंस्लटेशन एंड कोऑपरेशन (डब्ल्यूएमसीसी) और वरिष्ठ कमांडरों की बैठक के माध्यम से बाकी बचे इलाकों में जल्द सैनिकों की वापसी सुनिश्चित करेगा। यह दोनों देशों को पूर्वी लद्दाख मे सैन्य वापसी पर विचार करने की अनुमति देगा, क्योंकि यही शांति कायम करने और द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति का एकमात्र जरिया है। 
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जल्द सेना की वापसी चाहता है भारत 
पिछले महीने वरिष्ठ कमांडरों की 10वें दौर की बैठक में भारत ने हॉट स्प्रिंग, गोगरा और डेपसांग से चीनी सैनिकों की जल्द वापसी पर जोर दिया था। श्रीवास्तव ने कहा कि जयशंकर ने फोन पर वार्ता के दौरान अपने चीनी समकक्ष से दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर अन्य मुद्दों के जल्द समाधान पर भी जोर दिया। विदेश मंत्री ने कहा कि सभी संघर्ष वाले बिंदुओं से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों देश लद्दाख में व्यापक पैमाने पर सुरक्षाबलों की वापसी पर चर्चा करेंगे और क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में काम करेंगे। 

पाकिस्तान से सामान्य रिश्ते चाहता है भारत 
भारत और पाकिस्तानी सेनाओं के संघर्ष विराम का सख्ती से पालन करने की सहमति के बाद श्रीवास्तव ने कहा, भारत अपने सभी पड़ोसियों से सामान्य रिश्ते चाहता है। हमने हमेशा ही कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दे द्विपक्षीय बातचीत से हल होने चाहिए। अहम मुद्दों पर हमारी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 

तिब्बत के रास्ते दक्षिण एशिया तक पहुंचने की तैयारी में चीन 
वहीं, चीन अब तिब्बत के रास्ते दक्षिण एशिया पहुंचने की तैयारी कर रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 14वीं पंचवर्षीय योजना के तहत चीन तिब्बत में एक अहम मार्ग का निर्माण करेगा। मार्ग निर्माण का प्रस्ताव शुक्रवार को चीनी संसद में पेश किया गया। चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, इस प्रस्ताव को सत्ताधारी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे संसद की औपचारिक मंजूरी का इंतजार है। इसके अलावा चीन लंबे समय से तिब्बत और नेपाल के जरिये ट्रांस हिमालयन मल्टी डायमेंशन कनेक्टिविटी नेटवर्क का निर्माण करने की योजना बना रहा है। 2019 में चीन और नेपाल ने 2016 की परिवहन संधि को संचालित करने के लिए प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे नेपाल को विदेशी व्यापार के लिए चीनी बंदरगाहों के इस्तेमाल करने की मंजूरी देता है। नेपाल और चीन सड़क नेटवर्क के अलावा तिब्बत से नेपाल तक रेल नेटवर्क के विस्तार पर भी विचार कर रहे हैं। 
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चीनी उप विदेश मंत्री से मिले भारतीय राजदूत, पूर्वी लद्दाख के पूर्ण असैन्यीकरण पर की बात
चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिश्री ने शुक्रवार को चीन के उप विदेश मंत्री लुओ हाओहुई से मुलाकात की और पूर्वी लद्दाख में शेष बचे मोर्चों से भी सेनाओं के पूरी तरह पीछे हटने की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, इससे सीमा पर दोबारा शांति व स्थिरता बनाने में मदद मिलेगी तथा द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति में सुधार होगा। भारतीय दूतावास ने ट्वीट के जरिये इस बैठक की जानकारी दी। एक अन्य ट्वीट में कहा गया कि भारतीय राजदूत ने भारतीय नागरिकों से जुड़े प्रमुख राजनयिक मुद्दों को भी उठाया और इसका हल तलाशने का आग्रह किया। उप विदेश मंत्री लुओ इससे पहले भारत में चीन के राजदूत रह चुके हैं। 
 

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