भारत और चीन ने वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की 11वीं बैठक जल्द बुलाने पर सहमति जताई ताकि पूर्वी लद्दाख में संघर्ष वाली जगहों से पूरी तरह सेना की वापसी पर चर्चा हो सके।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पैंगोंग झील के उत्तरी व दक्षिणी किनारे से सैनिकों के पीछे हटने से शेष मुद्दों के जल्द समाधान की दिशा में अच्छा आधार प्रदान किया है।
भारत और चीन ने शुक्रवार को वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंस्लटेशन एंड कोर्डिनेशन (डब्ल्यूएमसीसी) की 21वीं बैठक में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शेष मुद्दों के समाधान को लेकर विस्तार से चर्चा की।
बैठक के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा, दोनों देशों को सभी संघर्ष वाले बिंदुओं से पूरी तरह सैन्य वापसी पर पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर पहुंचने के लिए वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई। इससे दोनों पक्षों को व्यापक पैमाने पर सैनिकों की वापसी और सीमा पर शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी।
दोनों पक्षों ने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि पिछले वर्ष सितंबर में मास्को में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बनी सहमति और पिछले महीने टेलीफोन पर हुई चर्चा के अनुरूप दोनों पक्षों को काम करना जारी रखना चाहिए। भारत और चीन ने किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए जमीनी स्तर पर स्थिरता बनाए रखने पर भी सहमति जताई।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों ने राजनयिक एवं सैन्य स्तर पर करीबी संवाद कायम रखने पर भी सहमत हुए। गौरतलब है कि पैंगोंग झील क्षेत्र में पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की बैठक 20 फरवरी को हुई थी। इसमें संघर्ष के अन्य इलाकों में पीछे हटने पर ध्यान केंद्रित किया गया था । समझा जाता है कि भारत हाट स्प्रिंग, गोगरा और डेपसांग में तेजी से पीछे हटने को लेकर जोर दे रहा है ।